
85 लोगों ने किया त्वचा दान, 1500 लोगों ने ली शपथ
बेंगलूरु. विक्टोरिया अस्पताल का त्वचा बैंक रंग ला रहा है। दान में मिली मानव त्वचा का इस्तमाल आग के शिकार लोगों के उपचार में सहजता से किया जा रहा है।
70 प्रतिशत जले कुछ मरीज त्चचा दोबारा नहीं आने के कारण सामान्य जीवन नहीं जी पाते। जले हुए भाग पर हालांकि कुछ समय बाद प्राकृतिक त्वचा आती है, लेकिन त्वचा का ऊपरी हिस्सा पहले जैसा नहीं हो पाता।
दान की गई त्वचा से इस हिस्से को बदलकर पहले जैसा बनाने में मदद मिल रही है। मार्च 2016 में स्थापना के बाद से 85 लोगों ने त्वचा दान किया है। जिससे विभिन्न कारणों से जलने के 40 मरीज लाभान्वित हुए हैं।
जबकि अन्य 1500 से ज्यादा लोगों ने त्वचा दान की शपथ ली है। अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रो. के.टी. रमेश ने बताया कि त्वचा बैंक से विक्टोरिया सहित अन्य अस्पतालों को भी आसानी हो रही है।
विक्टोरिया के बर्न वार्ड की बात करें तो यहां हर माह 200-220 मरीजों का उपचार होता है।
70 फीसदी मरीजों की हालत बेहद खराब होती है। त्वचा प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। प्रो. रमेश ने बताया कि अन्य अंगों की तरह त्वचा दान आसान है। इसमें रक्त समूह के मिलान की जरूरत नहीं पड़ती है।
18 वर्ष के ऊपर का कोई भी व्यक्ति जिसे त्वचा की कोई बीमारी या संक्रमण न हो वह त्वचा दान कर सकता है। उन्होंने बताया कि अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
पहले विक्टोरिया अस्पताल में मरने वाले मरीजों के परिजन काउंसलिंग के बावजूद उसके त्वचा दान के लिए तैयार नहीं होते थे। अब कई परिजन खुद आगे आ रहे हैं।
Published on:
08 Nov 2018 08:29 pm
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