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केएसओयू में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित

राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय KSOU (केएसओयू) में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एकल सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का गठन किया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी.ए. पाटिल इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। चर्चा का विषय बना था केएसओयू के पूर्व कुलसचिव (प्रशासन) पर लगे […]

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कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय

राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति थावरचंद गहलोत

राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति थावरचंद गहलोत ने कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय KSOU (केएसओयू) में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए एकल सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का गठन किया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी.ए. पाटिल इस समिति की अध्यक्षता करेंगे।

चर्चा का विषय बना था

केएसओयू के पूर्व कुलसचिव (प्रशासन) पर लगे रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के मद्देनजर राज्यपाल ने यह आदेश दिया। इन आरोपों के चलते मार्च 2025 में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था। यह मामला कर्नाटक विधानसभा में भी चर्चा का विषय बना था।

अन्य संबंधित मुद्दों की भी पड़ताल करने का अधिकार

जांच समिति के कार्यक्षेत्र में स्वीकृत पदों से अधिक अस्थाई शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति, पदनामों में बदलाव, अनावश्यक क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना तथा उनके लिए अस्थाई निदेशकों की नियुक्ति शामिल है। इसके अलावा, राज्य सरकार और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की मंजूरी के बिना पदों के सृजन, निजी अध्ययन केंद्र खोलने की अनुमति और वर्चुअल एजुकेशन ट्रस्ट, नई दिल्ली को 1.71 लाख रुपए की जमा राशि की भी जांच की जाएगी। समिति को जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य संबंधित मुद्दों की भी पड़ताल करने का अधिकार दिया गया है और उसे एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर चूक

गौरतलब है कि प्रारंभिक जांच के लिए उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के निर्देश पर कर्नाटक राज्य उच्च शिक्षा परिषद (केएसएचइसी) की उपाध्यक्ष एस.आर. निरंजना ने विश्वविद्यालय का दौरा कर साक्ष्य जुटाए थे। उनकी प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर चूक पाए जाने के बाद राज्य सरकार ने केएसओयू अधिनियम 1992 की धारा 8 के तहत सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने के लिए राज्यपाल से अनुमति मांगी थी।