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अग्रवाल महिला मंडल ने मनाया मेघ मल्हार

नारी सशक्तिकरण के लिए सांस्कृतिक मेला का आयोजन किया

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अग्रवाल महिला मंडल ने मनाया मेघ मल्हार

बेंगलूरु. अग्रवाल महिला मंडल की ओर से विजय नगर में मेघ मल्हार कार्यक्रम का आयोजन हुआ। अध्यक्षा सोनू अग्रवाल ने बताया कि मेघ-मल्हार कार्यक्रम के तहत अग्रवाल महिला मंडल के 20 वर्ष पूरे हुए। नारी सशक्तिकरण के लिए सांस्कृतिक मेला का आयोजन किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत हुए। प्रतियोगिताओं में सत्तर से अधिक बहनों ने हिस्सा लिया। नृत्य में नेहा डालमिया टीम बनसंकरी प्रथम, नीलम अग्रवाल टीम मैजेस्टिक द्वितीय तथा सारिका रुइया टीम कोरमंगला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। उपाध्यक्ष चंदा खेमका ने मंच संचालन किया।


अणुव्रत चेतना दिवस मनाया
मंड्या. बेंगलूरु शहर के मुख्य बाज़ार स्थित तेरापंथ सभा भवन में पर्युषण पर्व के तहत मंगलवार को अणुव्रत चेतना दिवस के रूप में मनाया गया।
उपासक राजमल बोहरा ने कहा कि अणुव्रत के छोटे-छोटे नियम हैं। उपासक स्वरूपचंद दाती ने भगवान पारसनाथ की जीवनी पर गीतिका की प्रस्तुति दी। उपासक पदमचंद आचलिया ने कहा कि धर्म की रक्षा करना बहुत कठिन है। इसी प्रकार बेंगलूरु के तेरापंथ सभा भवन में मुनि सुव्रत कुमार, मुनि मंगल प्रकाश के सान्निध्य में पर्युषण पर्व के पांचवें दिन अणुव्रत चेतना दिवस मनाया गया। मुनि मंगल प्रकाश ने कहा कि हमारे में त्याग की चेतना जगे। मुनि सुव्रत कुमार ने कहा कि आचार्य तुलसी ने अणुव्रत के माध्यम से प्रत्येक वर्ग के लोगों को जागृत किया।

गृहस्थावस्था में संयम का पालन कर सकते हैं
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, सिद्धार्थनगर सीआइटीबी में श्रुत मुनि ने पर्युषण के छठे दिन 'संयम ही जीवन हैÓ का वर्णन करते हुए कहा कि असंयम आने का कारण अज्ञान, आसक्ति, अन्धानुयोग, रुढि़वाद, अविवेक है। उन्होंने कहा कि प्रभु परमात्मा के आदेशों में संयम को सरल रूप से परीभाषित किया है। जीवन में देवगुरु, धर्म के प्रति अटूट आस्था, विवेक, नम्रता, मर्यादा, वाणी, विवेक के समावेश के द्वारा गृहस्थावस्था में भी मनुष्य संयम का पालन कर सकता है। मुनि ने कहा कि संयम का अर्थ पापों की रोकथाम, अज्ञानता का नाश, इन्द्रियों पर लगाम, व्यसनों का अंत एवं राग-द्वेष मिटाना है। सूई रूपी आत्मा में संयम रूपी धागा पिरोकर ज्ञान रूपी गांठ लगाना हितकर है। आगमों में वर्णन है 'संयम खलु जीवनमÓ अर्थात संयम ही जीवन है।

संयमी व्यक्ति को यतनापूर्वक चलना, खड़े रहने का, बैठने का, सोने का, विवेक का, आदरपूर्वक भोजन, प्रसाद ग्रहण करना, वाणी में मधुरता का समावेश करना है। अक्षर मुनि ने शास्त्र वाचन किया एवं तपस्वियों के प्रत्याख्यान दिलाए। इस अवसर पर पंकज पितलिया ने 9 उपवास, राहुल मुणोत ने 9 उपवास, बाबूलाल वाणीगोता ने 7 उपवास, मनीषा रांका ने 11 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। दिन में स्वाध्याय एवं थोकड़ो का जाप किया गया। महिलाओं के लिए मंगलचुंदड़ी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। बेंगलूरु से कल्याणसिंह बुरड़, भंवरलाल गादिया उपस्थित थे।