
गठबंधन के घटकों व भाजपा के बीच शह-मात का खेल
बेंगलूरु. जारकीहोली बंधुओं और शिवकुमार के बीच सियासी जंग के कारण सत्तारुढ़ गठबंधन के घटकों और विपक्षी भाजपा के बीच शह-मात का खेल चल रहा है। गठबंधन अपने विधायकों को टूटने से बचाने से बचाने की कोशिश में जुटा है तो भाजपा दोनों दलों के उन विधायकों लुभाने की कोशिश में जुटी है जो किसी कारण असंतुष्ट चल रहे हैं।
कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बढ़ाने के लिए जारकीहोली बंधुओं के भाजपा नेताओं के संपर्क में होने की भी चर्चा है। दोनों ही खेमा एक-दूसरे के विधायकों के संपर्क में होने और किसी भी समय पाला बदलने के लिए तैयार होने का दावा कर रहा है। हालांकि, गठबंधन के दोनों घटक अपनी मजबूत किलेबंदी का दावा कर भाजपा के सरकार गिराने की कोशिश को दिवास्वप्र करार दे रहे हैं तो भाजपा के नेता सरकार को अस्थिर करने की कोशिश से इनकार कर रहे हैं लेकिन सरकार गिरने का दावा भी कर रहे हैं।
भाजपा नेता कह रहे हैं कि अगर सरकार गिरती है तो हम मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे लेकिन सरकार को अपनी तरफ से गिराने की कोशिश नहीं करेंगे। विधायकों को लेकर दोनों पक्षों के बीच शह-मात का खेल चल रहा है। दूसरी तरफ बेलगावी के पीएलडी बैंक के चुनाव में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मी हेब्बालकर गुट की जीत को जारकीहोल्ली बंधुओं ने अपने वर्चस्व पर चोट माना है। जारकीहोली बंधुओं की जिले की राजनीति पर अपनी पकड़ फिर से मजबूत करने की कोशिश के कारण गठबंधन सरकार की मुश्किल बढ़ गई है।
लोकसभा चुनाव से पहले ही गठबंधन सरकार को गिराकर सत्ता हाथियाने की मुहिम में जुटे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.एस.येड्डियूरप्पा शहर के डालर्स कालोनी स्थित अपने निवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व विधायकों के साथ निरंतर बैठकें कर रहे हैं और प्रदेश में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में पार्टी आलाकमान के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए हैं। बेलगावी के जारकीहोल्ली बंधुओं के अलावा उत्तर कर्नाटक क्षेेत्र के विशेेषकर वाल्मिकी समुदाय के विधायकों को पार्टी की तरफ आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भाजपा नेता बी. श्रीरामुलू लगातार जारकीहोली बंधुओं के संपर्क मेें बताए जाते हैं लेकिन दोनों भाइयों ने भाजपा का दामन थामने को लेकर कोई स्पष्टता नहीं जताई है। उधर, बेलगावी के भाजपा नेता भी जारकीहोली बंधुओं को पार्टी में लाने की कोशिशेां का विरोध कर रहे हैं। बताया जाता है कि जारकीहोली बंधुओं के साथ जो 8-10 से विधायक हैं उनमें से अधिकांश वाल्मिकी समुदाय से हैं। ये विधायक लिंगायत बहुल सीटों से चुने गए हैं लिहाजा भाजपा को यकीन है कि उपचुनाव में उनको दुबारा जीतना आसान होगा।
हालांकि, भाजपा आलकमान इस बार ऑपरेशन कमल को लेकर काफी सजग है और पूर्ण संख्या बल के बिना कोई राजनीतिक जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। दूसरी तरफ भाजपा की सरकार गिराने की कोशिशों को नाकाम करने के लिए कांग्रेस व जद-एस के नेताओं ने कमर कस ली है। दोनों दलों के नेताओं का दावा है कि यदि भाजपा ने हमारे विधायकों को तोडऩे की कोशिश की तो हम भी भाजपा के 8 से 10 विधायकों को तोड़कर उनका खेल बिगाडऩे में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
Published on:
14 Sep 2018, 4:46 PM IST
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