
बेंगलूरु. एक अप्रत्याशित खगोलीय घटना के तहत 15 मई की रात एक लघु ग्रह पृथ्वी के बेहद निकट होकर गुजरेगा। पृथ्वी से इसके टकराने की कोई आशंका नहीं है। फिर भी निकटता की ऐसी स्थिति एक चेतावनी जैसी है और यह ग्रह नासा की पैनी नजर में है। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि इस लघु ग्रह का नाम 2010 डब्ल्यूसी-9 है। इसकी खोज 30 नवम्बर 2010 में एरिजोना के कैटालिना स्काई सर्वे के एक भाग के रूप में माउंट लैमन सर्वे के तहत हुई।
खोज होने के एक माह के भीतर यह लघुग्रह खो गया और 8 साल तक इसका कोई अता-पता नहीं मिला। पिछले 8 मई को उसी सर्वे के तहत इसका फिर पता चला। यह एक पृथ्वी निकट लघु ग्रह है और अपोलो वर्ग का है। यानी, वे निकटवर्ती लघु ग्रह जो पृथ्वी की कक्षा के भीतर आ जाते हैं। भारतीय समयानुसार 15-16 मई की रात प्रात: 3.35 बजे यह लघुग्रह पृथ्वी से केवल 2 लाख 3 हजार 453 किलोमीटर की दूरी से गुजर जाएगा। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा की बीच अधिकतम दूरी का लगभग आधा है। इस लघु ग्रह की निकटता की अगली स्थिति 17 अक्टूबर 2019 में होगी। किंतु तब यह पृथ्वी से 4 करोड़ 27 लाख किमी की दूरी से होकर गुजरेगा। इसके बाद निकटता की अगली स्थिति वर्ष 2200 में ही बनेगी।
46 हजार किमी प्रति घंटे की रफ्तार
प्रोफेसर कपूर ने बताया कि मंगलवार रात पृथ्वी के पास से गुजरते समय इस लघु ग्रह की गति 12.8 किमी प्रति सेकेंड अर्थात 46 हजार किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसका आकार 71 मीटर का है। इसलिए इसे पृथ्वी के पास से गुजरने वाले बेहद खतरनाक लघु ग्रहों से भी बड़ा माना जाएगा। वर्ष 1908 में साइबेरिया में गिरे लघु ग्रह से जो विनाश हुआ था वह सर्वज्ञात है और यह लघु ग्रह उससे भी बड़ा है। निकटता कि स्थिति में इसकी चमक होगी +11 होगी अर्थात इसे 10 सेंटीमीटर व्यास या इससे बड़ी दूरबीन से देखा जा सकेगा। यह सूर्य का परिभ्रमण 1.12 वर्ष में पूरा करता है। वर्ष 2017 में 2000 ऐसे नए लघु ग्रहों का पता चला जो पृथ्वी के निकट से होकर गुजरे। इस वर्ष ऐसे ही अनेक लघु ग्रहों का पहली बार पता चल रहा है। पृथ्वी निकट अंतरिक्ष में निगाह रखना बेहद जरूरी है क्योंकि संसार के अनेक देश अंतरिक्ष में सक्रिय हैं।
Published on:
14 May 2018 08:08 pm
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