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भाजपा के रणनीतिकार राम माधव ने की संघ से चर्चा

भाजपा ने चुनावी रणनीति बनाने में निपुण राम माधव को कर्नाटक चुनाव की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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राम माधव

बेंगलूरु. भाजपा ने चुनावी रणनीति बनाने में निपुण राम माधव को कर्नाटक चुनाव की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय महासचिव व रणनीतिकार राम माधव को बेंगलूरु भेजा है। गुरुवार रात यहां पहुंचे राम माधव ने शुुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थानीय पदाधिकारियों से करीब दो घंटे तक गुप्त बैठक की। राम माधव पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने, राष्ट्रीय नेताओं के दौरे तय करने, प्रचार की कार्यशैली, उम्मीदवारों के चयन, क्षेत्र वार उठाए जाने वाले चुनावी मसलों सहित पार्टी की जीत के लिए स्थानीय प्रमुख नेताओं से चर्चा कर रणनीति तैयार करेंगे।


उन्होंने शुक्रवार को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येड्डियूरप्पा, राज्य के प्रभारी मुरलीधर राव, जगदीश शेट्टर, के.एस. ईश्वरप्पा, आर.अशोक, बी.एल. संतोष सहित प्रमुख नेताओं के साथ शृंखलाबद्ध बैठकें कर आवश्यक जानकारी एकत्रित की।


बताया जाता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व बीएस येड्डियूरप्पा के दौरों के अनुकूल इलाकों के बारे में जानकारी जुटाई। इसके अलावा उन्होंने हिंदुत्व के अस्त्र को इस्तेमाल करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रदेश वार, जातिवार तमाम जानकारी एकत्रित की।

अभिनेता प्रकाश राज बोले, भ्रष्टाचार से सांप्रदायिकता अधिक घातक
चित्रदुर्गा. देश में सांप्रदायिक ताकतें मजबूत हो रही हैं। अगर कर्नाटक में सांप्रदायिक ताकतें सत्तारूढ़ होंगी तो राज्य में सर्वधर्म समभाव खत्म होगा। समाज में कटट्रता और धर्मांधता को बढ़ावा मिलेगा। देश के लिए भ्रष्टाचार से सांप्रदायिकता अधिक घातक है। फिल्म अभिनेता प्रकाशराज ने यह बात कही। उन्होंने यहां शुक्रवार को कहा कि वे किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी को वोट नहीं दिया है। लेकिन इसके बावजूद उनको प्रधानमंत्री को सवाल करने से कोई रोक नहीं सकता है।

लोकतंत्र में देश के हर नागरिक को सवाल पूछने का अधिकार है। इस अधिकार की रक्षा के लिए वे देश भर में संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि कावेरी जल बंटवारे की समस्या का राजनीतिकरण छोड़ कर हमें इसका स्थायी समाधान ढूंढने के प्रयास करने होंगे। कावेरी जलबहाव क्षेत्र में वन क्षेत्र घटने से पहले जैसी बारिश नहीं हो रही है। जिस कारण कभी 12 माह बहने वाली कावेरी अब केवल बारिश के दिनों में ही बहती है।


प्राकृतिक संसाधनों के साथ की गई छेड़छाड़ का खामियाजा हमे भुगतना पड़ रहा है। लेकिन इस मूल समस्या के समाधान पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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