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ध्यान से करें अपने दिन की शुरुआत

जब दृष्टि बाहर की ओर होती है तो बाहरी पदार्थों में, साधनों में, सुविधाओं में सुख नजर आता है

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बेंगलूरु. राजाजीनगर में साध्वी संयमलता ने कहा कि सुख, सुविधाओं के साधन व्यक्ति को दूसरों पर निर्भर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आप कहां हो, यह महत्वपूर्ण नहीं, लेकिन महत्त्वपूर्ण यह है कि आपकी दृष्टि कहां पर है। जब दृष्टि बाहर की ओर होती है तो बाहरी पदार्थों में, साधनों में, सुविधाओं में सुख नजर आता है। साध्वी कमलप्रज्ञा ने कहा कि अपने दिन की शुरुआत मोबाइल और अखबार से नहीं, आगम और ध्यान से करें। तपस्वी प्रियंका कोटरिया का बहुमान किया गया।

पुण्य कर्म से प्राप्त होता है भौतिक सुख
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ श्रीरामपुरम में साध्वी दिव्य ज्योति ने कहा कि संसार में हमें भौतिक सुख देने वाला एवं आध्यात्मिक सुख देने वाला धर्म है। उन्होंने कहा कि पुण्यकर्म के उपार्जन से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और पापकर्मों के क्षय से आध्यात्मिक सुखों की प्राप्ति होती है। मोक्ष मार्ग पर बढऩे का प्रथम साधन है दान। दान अर्थात मोह का त्याग, जीवन में देने के संस्कार नहीं तो दान नहीं हो सकता।

जिसने दिल खोलकर दान दिया उनका नाम इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों से लिखा गया। अत: पुण्योदय से कुछ मिला है तो देना सीखो। जिसकी देने की भावना है वह देव और जिसकी लेने की भावना है दानव है। मानव जीवन की सार्थकता दान रूप धर्म का आचरण करने में है। साध्वी अमित सुधा ने कहा कि पुण्योदय से प्राप्त इस दुर्लभ मनुष्य भव का एक मात्र लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति होना चाहिए।

जिस प्रकार समुद्र की गहराई में उतरने से कुछ न कुछ अवश्य प्राप्त होता है, उसी प्रकार सच्ची श्रद्धा के साथ धर्म की गहराई में उतरने से अवश्य ही मोक्ष मार्ग की प्राप्ति होती है। हमें जिनवाणी श्रवण कराने वाले साधु-साध्वियां अनेक परिस्थितियों को सहन करते हुए, अपने संयम धर्म का पालन करते हुए हमें संदेश देते हैं कि अगर पुण्य का अर्जन करना है तो पापों का नाश करना है। मुक्ति मार्ग पर आगे बढऩा है तो श्रावक धर्म का पालन दृढ़ता से करना होगा।