12 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नया सवेरा, नई उड़ान में बताई तकनीक

खटमल के काटने पर बिल्ली की शरण में जाने वाला चूहा जिस प्रकार सुरक्षित नहीं रह सकता

2 min read
Google source verification
workshop

बेंगलूरु. जेसीआई बेंगलूरु गार्डन सिटी के जेसीआरटी विंग की ओर से आयोजित नया सवेरा नई उड़ान कार्यक्रम में महिलाओं को मासिक धर्म में होने वाली असुविधाओं और नई तकनीक इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। वक्ता डॉ. मीनाक्षी भरत व लता कृष्णन ने समाज सुधारक कार्यक्रम की सराहना की। मुख्य अतिथि जेसीआई उपाध्यक्ष रोषेल बार्टो थे। अध्यक्ष मुकेश भंडारी, चेयरपर्सन रक्षा छाजेड़, सचिव चंद्रा जैन, प्रीति बल्डोटा आदि उपस्थित थे।


प्रवचन: धर्माचरण ही व्यक्ति की पहचान है
बेंगलूरु. जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ शांतिनगर में आचार्य महेेंद्र सागर सूरी ने कहा कि धन कमाने की इच्छा बिना व्यापारी नहीं होता, वैसे ही मोक्ष पाने की इच्छा बिना सच्चा धर्मी भी नहीं होता।

उन्होंने कहा कि देव गुरु और धर्म का योग जहां भी हो जाए ऐसी जगह ही धर्मी आर्थिक, व्यावहारिक और सामाजिक संबंध को जोड़ कर शहर गांव को पसंद करता है। सब कुछ अनुकूल हो किंतु धर्म आराधना के स्थान और देव गुरु धर्म का संपर्क न हो सके वैसा स्थान मिले तो धर्मी ऐसे स्थान का, चाहे कितना भी फायदेमंद हो, चयन नहीं करेगा।

व्यक्ति के धर्म काम, धर्माचरण ही उसकी पहचान है, वर्ना एक ही नाम के हजारों इंसान होते हैं। धर्मी की पहचान यह है कि धर्म के साथ उसको धन चाहिए। धर्म को छोड़कर यदि धन मिलता हो तो उसको धन नहीं चाहिए। वह ठीक तरह से जानता है कि धर्म होगा तो धन मिल ही जाएगाा, पर धन होगा तो धर्म मिलेगा कि नहीं इसमें संदेह है।

क्रोध की शरण में जाने वाला इंसान कभी सुरक्षित नहीं
बेंगलूरु. जय परिसर महावीर धर्मशाला में जयधुरन्धर मुनि ने कहा कि क्रोध आने के जो निमित्त उपस्थित होते हैं उन्हीं निमित्तों में क्षमा का गुण अपनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्रोध आना मनुष्य का नैसर्गिक स्वभाव नहीं है। व्यक्ति को लगता है कि क्रोध किए बिना काम नहीं होता, परंतु यह गलत धारणा है।

गुस्सा करने पर भी यदि काम नहीं होता है तो उसको और अधिक क्रोध आता है। मुनि ने कहा कि धन या किसी वस्तु विशेष का नुकसान होने पर उसकी भरपाई संभव है, पर उसके लिए किया गया क्रोध आत्मा के लिए ज्यादा नुकसानदायक सिद्ध होता है। खटमल के काटने पर बिल्ली की शरण में जाने वाला चूहा जिस प्रकार सुरक्षित नहीं रह सकता, उसी प्रकार क्रोध की शरण में जाने वाला इंसान कभी सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि धन गया तो कुछ नहीं गया, तन गया तो कुछ गया, पर चारित्र गया तो सब कुछ गया। क्रोध प्रीति का नाश करता है। क्रोधी व्यक्ति स्वयं भी जलता है और दूसरों को भी जलाता है। सभा में रेखा रूणवाल ने 9 उपवास, दीपेश खींवसरा, ममता गोटावत ने 8 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।