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किसानों का कर्ज माफ करे केंद्र सरकार : रेड्डी

रेड्डी ने कहा कि किसान कई समस्याओं और संकटों से जूझ रहे हैं और उनका ऋण माफ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे आने की जरूरत है

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गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी

बेंगलूरु. गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि किसान कई समस्याओं और संकटों से जूझ रहे हैं और उनका ऋण माफ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने मंगलवार को चिकबल्लापुर में कहा कि मोदी हमेशा किसानों की हित और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की बातें करते हैं।

उन्हें चाहिए कि देश के सभी किसानों का ऋण माफ करने की घोषणा करें। सरकार ने छोटे किसानों का कर्ज माफ किया है। राष्ट्रीय बैंकों से प्राप्त कर्ज केवल केन्द्र सरकार ही माफ कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयास से प्रदेश में हर दिन ६८.२४ लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। हर साल ८०,७१६ लाख अंडों का उत्पादन हो रहा है। सरकार हर लीटर पर पांच रुपए की सब्सिडी दे रही है। इससे ८.९७ लाख दूध उत्पादकों को लाभ हो रहा है।


उन्होंने कहा कि पांच साल में सब्सिडी के रूप में ६२४ करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। सरकार ने २०१५ में पशु भाग्या शुरू की। इस योजना के तहत अभी तक १४५ करोड़ रुपयों का अनुदान जारी किया गया है और ५९,१९३ लाभार्थियो को लाभ मिल रहा है।

कावेरी कायाकल्प परियोजना शुरू
मडिकेरी. ग्रामीण विकास और पंचायत राज (आरडीपीआर) विभाग के साथ मिलकर द आर्ट ऑफ लिविंग (एओएल) संस्था ने मंगलवार को कोडूगू जिले में कावेरी कायाकल्प परियोजना का शुभारंभ किया।


इस मौके पर एओएल के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि एओएल के सहयोग से कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र की ३५ नदियों और उनकी सहायक नदियों का कायाकल्प किया जा रहा है। नदियों के संरक्षण में नागरिक संगठनों और सरकार को आगे आना चाहिए। उन्होंने नदियों के बहाय क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण को रोकने और नदियों को जीवन देने के लिए तटवर्ती क्षेत्रों वृक्ष लगाने और सफाई करने का जोर दिया।


उन्होंने कहा कि नदियों की सफाई के लिए एओएल भारतीय अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संस्थान (इसरो) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले चरण में जिले के नदी के तटवर्ती क्षेत्र में ७५१ जलमुक्त ढांचों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे कावेरी में अधिक जल संग्रहित होगा, जिससे कई दक्षिणी राज्यों के साथ-साथ बेंगलूरु की पेयजल संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।