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चिंतामणि रत्न सहजता से नहीं मिलता

धर्मसभा का आयोजन

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चिंतामणि रत्न सहजता से नहीं मिलता

चिंतामणि रत्न सहजता से नहीं मिलता

बेंगलूरु. मुनिसुव्रत स्वामी जैन श्वेताम्बर संघ कंटोनमेंट में विराजित साध्वी भव्यगुणाश्री व साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि कांच के टुकड़े तो हजारों मिल जाते हैं। चिंतामणि रत्न सहजता से नहीं मिल पाता, जिस तरह पत्थर एक ही खदान से निकलता है। लेकिन मूर्ति बन जाने पर पूजनीय बन जाता है, उपाश्रय में लग जाने पर वंदनीय बन जाता है और मकान में लग जाने से ना तो पूजनीय होता है। ना ही वंदनीय होता है उसी तरह एक ही माता की कोख से जन्म लेने के बाद भी समानता नहीं होती है। क्योंकि कर्म अलग अलग होते हैं। अच्छे कर्म का परिणाम भी अच्छा होगा और बुरे कर्म का परिणाम बुरा ही होगा। फल और फूल, पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं परन्तु फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता है उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूं ना हों, पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती है।
साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि जब तक मन में काम क्रोध,और लोभ रहता है, तब तक मूर्ख और ज्ञानी में कोई अन्तर नही होता। आपकी अच्छाइयां बेशक अदृश्य हो सकती हैं लेकिन इनकी छाप हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है। आज 108 उवस्सगहरं अभिषेक का लाभ कोयम्बतूर निवासी राजेंद्र कुमार पोरवाल ने लिया।