
उपभोक्ताओं को नहीं मिला 15 लाख करोड़ का लाभ
बेंगलूरु। पूर्व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री व कांग्रेस नेता एम वीरप्पा मोइली देश में पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमत पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, मौजूदा केन्द्र सरकार डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर तनिक भी संवेदनशील नहीं है। जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी तब केंद्र सरकार ने उसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिया। उस समय केंद्र सरकार ने तेल पर जितना कर लगाया वह न सिर्फ देश में बल्कि विश्व में सबसे अधिक था। केंद्र सरकार के ऊंचे उत्पाद कर के कारण हम 15 लाख करोड़ रुपए के लाभ से वंचित हो चुके हैं।
जब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई थी तब उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाना चाहिए था। जब मैं पेट्रोलियम मंत्री था तब कच्चे तेल की कीमतों में आने वाली गिरावट या बढ़ोत्तरी का लाभ उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंचाया। वर्तमान सरकार की नीतियां इसके ठीक उलट हैं। यूपीए सरकार ने जो नीति बनाई थी उस हिसाब से कच्चे तेल की
अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुताबिक कमी या बढ़ोत्तरी होती थी। लेकिन, वर्तमान सरकार ने बिना किसी नीतिगत फैसले किए या मंत्रिमंडल में चर्चा किए फिर से पुरानी नीति को ही थोप दिया। तेल की कीमतों में भारी गिरावट के मुताबिक देश में कीमतें नहीं गिरीं और उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिला। आज जो स्थिति उपजी है उसके लिए पूरी तरह केंद्र सरकार की नीतियां ही जिम्मेदार हैं। तेल की कीमतों में आई गिरावट से जो पैसा जमा किया उसे तेल कंपनियों को सब्सिडी देकर आम उपभोक्ताओं तक राहत पहुंचाना चाहिए। हमने ऐसा किया था। वे क्यों नहीं कर रहे। सरकार को तुरंत इसमें दखल करना चाहिए और कीमतों में कटौती करनी चाहिए। उपभोक्ताओं को 15 लाख करोड़ रुपए के लाभ से वंचित किया, अब उन्हें लौटाने की बारी है। लेकिन, केन्द्र की यह सरकार ऐसी है कि किसी की सुनती ही नहीं। चाहे विपक्ष हो या जनता की अवाज। किसी की तनिक परवाह नहीं। सरकार की गलत नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता घटेगी। जीडीपी पर भी इसका असर पड़ेगा और विकास दर स्थिर होजाएगी। जब तक सरकार हस्तक्षेप नहीं करती जनता को कोई राहत नहीं मिलेगी।

Published on:
10 Sept 2018 12:11 am
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