1 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

द्वि भाषा नीति लागू करने से पहले लोकतांत्रिक संवाद जरूरी : एआइडीएसओ

तीसरी भाषा को अनिवार्य उत्तीर्णता से हटाने के कारण अब कुल अंक 625 से घटाकर 525 कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम विशेष रूप से हिंदी भाषा के संदर्भ में लिया गया है। इससे राज्य में द्वि भाषा नीति लागू करने का रास्ता साफ होता है।

less than 1 minute read
Google source verification

file photo

अखिल भारतीय लोकतंत्रिक छात्र संगठन All India Democratic Students' Organization (एआइडीएसओ) कर्नाटक राज्य समिति ने राज्य Karnataka सरकार के एसएसएलसी परीक्षा में तीसरी भाषा Third Language के अंकों को हटाने और ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने के फैसले पर आपत्ति जताई है।

संगठन AIDSO ने कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण शिक्षा संबंधी निर्णय बिना किसी पूर्व चर्चा और परामर्श के लेना अलोकतांत्रिक है। तीसरी भाषा को अनिवार्य उत्तीर्णता से हटाने के कारण अब कुल अंक 625 से घटाकर 525 कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम विशेष रूप से हिंदी भाषा के संदर्भ में लिया गया है। इससे राज्य में द्वि भाषा नीति लागू करने का रास्ता साफ होता है।

लंबे समय से मांग

संगठन के अनुसार भाषा विशेषज्ञ और शिक्षाविद लंबे समय से द्वि भाषा नीति Two Language Policy की मांग कर रहे थे, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह बदलाव किया है। हालांकि, संगठन ने परीक्षा के बीच में ही इस तरह के निर्णय को अनुचित बताया। यदि छात्र हित के नाम पर इस तरह बिना संवाद के नीतियां लागू की जाती रहीं, तो भविष्य में शिक्षा-विरोधी फैसलों का रास्ता खुल सकता है। शैक्षणिक सत्र के अंत में, बिना शिक्षकों और अभिभावकों की राय लिए नीतियों में बदलाव करना शिक्षा की मूल भावना के खिलाफ है।

व्यापक लोकतांत्रिक परामर्श सुनिश्चित किया जाए

संगठन ने राज्य में मातृभाषा और अंग्रेजी पर आधारित द्वि भाषा नीति लागू करने का समर्थन करते हुए सरकार से मांग की है कि ऐसे किसी भी निर्णय से पहले व्यापक लोकतांत्रिक परामर्श सुनिश्चित किया जाए।