
सबरीमाला विवाद में कूदे धर्मस्थल के धर्माधिकारी डॉ वीरेन्द्र हेगड़े
मेंगलूरु. धर्मस्थल के धर्माधिकारी डॉ वीरेन्द्र हेगड़े का मानना है कि केरल के सबरीमाला मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों को लेकर जो सदियों पुरानी परंपराएं मौजूद हैं, उनके साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
सबरीमला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश को लेकर मचे घमासान के बीच वीरेन्द्र हेगड़े ने मंगलवार को कहा कि यह जरूरी है कि धार्मिक स्थानों की पवित्रता को नियंत्रित करने वाली परंपराओं को संरक्षित रखा जोए, जिसमें सबरीमाला मंदिर से जुड़ी परंपराएं भी शामिल हैं। समाज को उन परंपराओं के पीछे निहित उस इरादे को समझना चाहिए, जिसके साथ इन परंपराओं को तैयार किया गया है। इसे लैंगिक असमानता या भक्ति के साथ भ्रमित नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि सबरीमाला के लिए जाने से पहले पुरुष 48 दिनों की तपस्या करते हैं। वे अपने घर और सभी सांसारिक एवं भौतिक सुख से दूर रहते हैं। इन तपस्याओं को आत्म नियंत्रण माना जाता है। उन्होंने महिलाओं द्वारा उठाए जा रहे मी-टू मुद्दे को जोड़ते कहा कि जब कोई आत्म नियंत्रण में विफल रहता है, तब इसके परिणामस्वरूप असमानता होती है और मी-टू की घटनाएं होती हैं।
उन्होंने कहा कि न सिर्फ भारत में सबरीमाला मंदिर या कुछ अन्य धार्मिक स्थलों पर बल्कि विदेशों में भी कई जगहों पर इस प्रकार की परंपराएं लागू हैं। इसलिए बेहतर है कि हम अपनी सदियों पुरानी परंपराओं को संरक्षित करें।
सबरीमाला से जुड़ी मौजूदा परंपरा को बरकरार रखने की तरफदारी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आज सबरीमाला की परंपरा तोड़ी जाती है तो संभव है कि कल समानता के नाम पर इसका अन्य प्रकार से दुरुपयोग हो। कुछ पुरानी परंपराएं और रीति-रिवाज अवश्य ही रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े सवाल से ज्यादा बड़ा सवाल मान्यताओं का कायम रखने का है क्योंकि यह आस्था से जुड़ा मामला है।
Published on:
24 Oct 2018 05:48 pm
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