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डीजल की मूल्य बढ़ोतरी से किसान का बजट चरमराया

इस वर्ष डीजल के मूल्यों में 24 फीसदी इजाफा

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डीजल की मूल्य बढ़ोतरी से किसान का बजट चरमराया

संजय कुलकर्णी

बेंगलूरु. डीजल के मूल्यों में हो रही वृद्धि के कारण किसानों में आक्रोश व्याप्त है। कृषि मजदूरों के अभाव में अब किसान खेती के लिए ट्रैक्टर समेत कई अद्यतन कृषि यंत्रों का उपयोग कर रहे हैं, जिनके लिए डीजल जरूरी है। छोटे किसान भी अब कृषि गतिविधियों के लिए ऐसे उपकरणों पर निर्भर हंै। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष डीजल के मूल्यों में 24 फीसदी वृद्धि होने के कारण किसानों का बजट चरमरा गया है। राज्य किसान संघ के अध्यक्ष कोडीहल्ली चंद्रशेखर के मुताबिक डीजल की मूल्य वृद्धि का असर केवल शहरों के उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। किसान डीजल के बड़े उपभोक्ता हैं। डीजल कीमत बढऩे से कृषि केंद्रों में किराए पर उपलब्ध कृषि उपकरणों का किराया बढ़ा है।

कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचाने के लिए अधिकतर किसान ट्रैक्टर का ही उपयोग करते हैं, जिससे परिवहन खर्चा भी बढ़ता जा रहा है। जिनके पास ट्रैक्टर नहीं हैं, ऐसे किसान निजी माल वाहक वाहनों तथा लॉरी मालिकों पर निर्भर हैं। इन्होंने भी डीजल के मूल्य बढ़ोतरी का हवाला देते हुए परिवहन शुल्क बढ़ा दिए हैं।

राज्य गन्ना उत्पादक किसान संघ के अध्यक्ष कुरुबुर शांतकुमार के मुताबिक गन्ना उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ गई है। नियमित बिजली आपू्र्ति के अभाव में किसान सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले पंपसेट का उपयोग कर रहे हैं। सिंचाई का मासिक खर्चा 1500 से 2000 रुपए तक बढ़ा है। मंड्या तथा हासन जिले के किसानों ने हाल में इस मूल्य वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन किया है। इस वर्ष जनवरी माह से लेकर जून माह तक डीजल के मूल्यों में 16 फीसदी वृद्धि हुई है।

वृद्धि से उत्पादन खर्र्च अनियंत्रित
बेंगलूरु कृषि विवि के पूर्व कुलपति डॉ शिवण्णा के मुताबिक जब कृषि का यांत्रिकीकरण अनिवार्य है, तो डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने की कार्य योजना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देहात में रोजगार के तलाश में कृषि मजदूरों का पलायन बढऩे से किसानों की यंत्रों पर निर्भरता बढ़ी है। जिस प्रकार से मछुआरों की नौकाओं के लिए रियायती दरों पर डीजल की आपूर्ति की जाती है, उसी तर्ज पर किसानों को भी कृषि उपकरणों के लिए कृषि सेवा केंद्रों के माध्यम से रियायती दरों पर डीजल की आपूर्ति की जानी चाहिए। खुले बाजार से मौजूदा कीमतों पर डीजल खरीद पाना छोटे किसानों के लिए संभव नहीं है।