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इसरो अध्यक्ष के तौर पर हर पल रहा खुशनुमा: सोमनाथ

चुनौतियों से जूझने और सफलता हासिल करने का संतोष

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस.सोमनाथ लगभग इसरो में साढ़े तीन दशक की सेवाओं के बाद 14 जनवरी को सेवानिवृत हो जाएंगे। इसरो अध्यक्ष के तौर पर उनके तीन साल का कार्यकाल भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के इतिहास का स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। इस दौरान भारत ने न सिर्फ दशकों की लंबित परियोजनाओं को पूरा किया बल्कि, भविष्य के मिशनों की मजबूत बुनियाद रखी।

कार्यकाल पूरा होने से पहले पत्रिका के साथ संक्षिप्त बातचीत में सोमनाथ ने कहा कि, तीन साल के कार्यकाल का हर पल खुशनुमा रहा। ऐसा कोई एक पल नहीं है जिसका वह विशेष रूप से उल्लेख करें। इस दौरान वह चुनौतियों से जूझे और सफलता भी हासिल की। जब इसरो अध्यक्ष का पद संभाला तब, कई ऐसी महत्वपूर्ण चीजें थी जिन्हें करना आवश्यक था। अंतरिक्ष क्षेत्र की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के साथ ही निजी कंपनियों के लिए एक इकोसिस्टम तैयार करना था। इन-स्पेस को फंक्शनल करना था। इन-स्पेस, एन-सिल और इसरो की भूमिकाएं तय करते हुए अंतरिक्ष नीति तैयार करनी थी। इसरो एक दायरे में रहकर कार्य कर रहा था जिसे विस्तार देना था। खुशी की बात है कि, इसमें कामयाबी मिली। इसके अलावा जो मिशन कतार में थे जैसे, चंद्रयान-3, आदित्य एल-1, एक्सपोसैट, स्पेडेक्स आदि को संपूर्ण तैयारी के साथ सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

उपलब्धियों से भरा स्वर्णिम काल
दरअसल, एस सोमनाथ के कार्यकाल के दौरान कोरोना की चुनौतियों के बावजूद इसरो ने कुल 17 लांच मिशन पूरे किए। इसी अवधि में एक नए रॉकेट एसएसएलवी का विकास हुआ जो लघु उपग्रहों के प्रक्षेपण में बेहद उपयोगी साबित होगा। सोमनाथ की अध्यक्षता के दौरान ही, भारत ने अगले दो दशक के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की। वर्ष 2040 तक चंद्रमा पर मानव मिशन भेजने, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण, शुक्र मिशन, चंद्रयान-4 और चंद्र मिशनों की शृंखला के अलावा अगली पीढ़ी के प्रक्षेपणयान एनजीएलवी के विकास समेत कई नई परियोजनाओं की नींव पड़ी।

अब बच्चों के मार्ग निर्देशन का मिशन
दो प्रक्षेपणयानों पीएसएलवी और जीएसएलवी के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले सोमनाथ ने कहा कि, जीएसएलवी के विकास से उन्हें काफी खुशी मिली। सेवानिवृत्ति के बाद की योजना पर उन्होंने कहा कि, बच्चों के मार्ग निर्देशन के अभियान को आगे बढ़ाएंगे। बच्चे देश का भविष्य हैं और उन्हें सही राह दिखाना हम सभी की जिम्मेदारी है। कौशल विकास मंत्रालय और युवा मामलों के मंत्रालय की ओर से इस तरह का एक कार्यक्रम दिल्ली में किया जा रहा है जिसमें उनकी भूमिका होगी। तीन साल के कार्यकाल के दौरान सोमनाथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से भी गुजरे। उन्हें कैंसर जैसी घातक बीमारी से तब जूझना पड़ा जब आदित्य एल-1 मिशन लांच हो रहा था। लेकिन, वह जल्द स्वस्थ होकर लौटे और इसरो में अपने कर्तव्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता दिखाई। अब वह बच्चों के मार्ग निर्देशन का कार्य एक मिशन की तरह करना चाहते हैं।