
गौरी लंकेश हत्या मामले में आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी
बेंगलूरु. पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआइटी) ने आरोपी परशुराम वाघमारे से घटनास्थल की पहचान करवाई है। यह प्रक्रिया शुक्रवार रात गुप्त तरीके से की गई।
आरोपी को राजराजेश्वरी नगर स्थित गौरी लंकेश के घर के पास ले जाया गया। परशुराम ने एसआइटी के अधिकारियों को वारदात के लिए आने और जाने वाले मार्ग की पहचान कराई। उसने बताया कि अमोल काले ने बाइक पर उसे घर से कुछ दूर छोड़ दिया था। वारदात के बाद वह बाइक पर ही भागा था। वहां से कामाक्षीपाल्या में अमोल काले के किराए के मकान पर गया। जहां वे टीवी चैनलों पर हत्या से संंबंधित खबरें देखते रहे। फिर सभी ने मिलकर पार्टी की। अगले दिन उसे सिटी रेलवे स्टेशन से सिंदगी भेज दिया गया।
साथियों को पहचानने से किया था इनकार
परशुराम ने गिरफ्तारी के बाद शुरुआती पूछताछ में अमोल काले, शिकारीपुर के सुजीत कुमार और मनोहर की तस्वीरें देखकर पहचानने से इनकार कर दिया था। जब एसआइटी ने सबूत सामने रखे तो परशुराम ने माना कि वह तीनों को जानता है। एसआइटी ने शुक्रवार को ही उसे बेलगावी जिले में खानपुर के जंगलों में ले जाकर जांच की। जहां परशुराम को काले और मनोहर ने पिस्तौल चलाने का प्रशिक्षण दिया था। परशुराम ने कहा है कि वह नवीन कुमार और अमित देगवेकर को नहीं पहचानता। वह एक धार्मिक संगठन में सक्रिय था, जहां उसकी पहचान शिकारीपुर के सुजीत से हुई। उसी ने पुणे में अमोल काले से परिचय कराया था।
परिवार की जिम्मेदारी लेने तैयार था अमोल
परशुराम के अनुसार जब उसे हत्या करने को कहा गया था तो पहले वह तैयार नहीं था। काले दबाव डाल रहा था और उसे आश्वासन दिया था कि उसे फंसने नहीं देगा। यदि गिरफ्तारी हुई तो वह जुबान बंद रखे। यदि पुलिस दबाव डाले तो आत्महत्या कर ले। अमोल ने परशुराम के परिवार की जिम्मेदारी लेने की कमस खाई थी।
अब भी तीन लोगों की तलाश
परशुराम ने बताया है कि हत्या करने के बाद काले कोट वाले एक व्यक्ति ने उसे १० हजार रुपए दिए थे। उसके साथ एक और व्यक्ति भी था और सब उसे दादा कह कर बुलाते थे। हत्या के लिए एक अन्य व्यक्ति ने बाइक उपलब्ध कराई थी। एसआइटी अब इन तीनों व्यक्तियों को तलाश कर रही है।
Published on:
23 Jun 2018 10:48 pm
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