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महासभा का नेतृत्व धर्मसंघ की सभी सभाओं का सौभाग्य

जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महासभा के तत्त्वावधान में तेरापंथ भवन गांधीनगर में शुक्रवार को साध्वी कंचनप्रभा आदि ठाणा ५ के सान्निध्य मेें विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई।

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महासभा का नेतृत्व धर्मसंघ की सभी सभाओं का सौभाग्य

महासभा का नेतृत्व धर्मसंघ की सभी सभाओं का सौभाग्य

बेंगलूरु. जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महासभा के तत्त्वावधान में तेरापंथ भवन गांधीनगर में शुक्रवार को साध्वी कंचनप्रभा आदि ठाणा ५ के सान्निध्य मेें विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में नमस्कार महामंत्र उच्चारण के बाद साध्वी कंचनप्रभा ने तेरापंथ महासभा के गठन व उसके गतिमान पर विस्तार से प्रकाश डाला और मौजूदा अध्यक्ष हंसराज बेताला व अन्य पदाधिकारियों के सेवा कार्यों की सराहना की।


उन्होंने कहा कि आचार्य महाश्रमण ने महासभा को संस्था शिरोमणि महासभा अलंकरण प्रदान किया, जो हमारी समाज की उपलब्धि है। आचार्य के २०१९ चातुर्मास को सफल बनाने में चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मूलचंद नाहर जागरुक हैं। साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि विनीत, अनुशासित व समर्पित श्रावकत्व की उपलब्धि तेरापंथ की पहचान है। आचार्य भिक्षु की मर्यादा की सफलतम अनुपालना के साथ जैन शासन का गौरव भी है।

यह तेरापंथ महासभा की उपलब्धि है। साध्वी मंजुरेखा, साध्वी उदितप्रभा, साध्वी निर्भयप्रभा एवं साध्वी चेलनाश्री ने शासन भक्ति भरा सुमधुर गीत का संगान किया। अध्यक्ष बेताला ने कहा कि तेरापंथ धर्म संघ का संगठन पक्ष मजबूत है, क्योंकि हमारा विशाल श्रावक समाज गुरू इंगित के सामने कोई तर्क नहीं करता। आचार्य के चातुर्मास के लिए आचार्य तुलसी महाप्रज्ञ चेतना सेवा केन्द्र का निरीक्षण किया है। मंत्री विनोद बैद ने श्रावक समाज को जुडऩे का आह्वान किया।


संगोष्ठी में शहर के सभी उपनगरीय सभाओं के पदाधिकारी उपस्थित थे। ट्रस्टी ज्ञानचंद आंचलिया, महासभा उपाध्यक्ष कन्हैयालाल गिडिय़ा ने भी विचार व्यक्त किए। धन्यवाद दीपचंद नाहर ने दिया। मूलचंद नाहर ने अध्यक्ष बेताला का साहित्य प्रदान कर सम्मान किया। संचालन मंत्री प्रकाश लोढ़ा ने किया। यशवंतपुर सभा के अध्यक्ष प्रकाश बाबेल, उपाध्यक्ष कैलाश बोराणा, सुशील चौरडिय़ा, संगठन मंत्री ललित आच्छा, सहमंत्री सम्पत चावत, कोषाध्यक्ष अशोक कोठारी ने साध्वी एवं बेताला को पत्रिका भेंट की।

विनय धर्म का मूल
बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में महावीर धर्मशाला में सातवे व्रत का विवेचन करते हुए जयधुरन्धर मुनि ने कहा कि एक आदर्श श्रावक अपनी आजीविका का साधन जुटाने के लिए अल्प हिंसा वाले धंधे करता है। जिस व्यापार में कर्मों के वृंद एकत्रित हो, वैसा काम आचरित करने योग्य नहीं होता। इससे पूर्व जयपुरन्दर मुनि ने उत्तराध्ययन सूत्र के प्रथम अध्ययन की वाचनी देते हुए कहा कि विनय धर्म का मूल है। जिस प्रकार जड़ के बिना वृक्ष नहीं टिक सकता, नींव के निबा मकान ध्वस्त हो जाता है, उसी प्रकार विनय के अभाव में धर्माचरण नहीं हो सकता। तिरुतनी गौशाला के संस्थापक ट्रस्टी प्रसन्नचंद छाजेड़ ने संक्राति की महामांगलिक कार्यक्रम की विनती की।