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6 जिलों में अतिवृष्टि, 16 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं

बेरहम मौसम : बाढ़ और सूखे की दोहरी मार

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6 जिलों में अतिवृष्टि, 16 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं

बेंगलूरु. राज्य इस वर्ष मानसून की अजीब मार झेल रहा है। एक ओर राज्य का कोडुगू बाढ़ की विभीषिका झेल रहा है और तटीय तथा कावेरी जलप्रवाह वाले आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है, वहीं राज्य के 16 जिले अतिवृष्टि की मार झेल रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब राज्य सरकार इन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की तैयारी में दिख रही है। इस प्रकार राज्य का बड़ा भूभाग जहां मानसून की अतिवृष्टि से अस्त-व्यस्त है वहीं 16 जिले पानी को तरस रहे हैं।

राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर आंतरिक कर्नाटक के 12 जिलों के साथ ही दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के 4 जिलों में इस दक्षिण पश्चिम मानसून की बारिश औसत से कम हुई है। इस वर्ष राज्य के अधिकांश जिलों में मानसून पूर्व की अच्छी बारिश हुई थी लेकिन 1 जून को मानसून प्रवेश के बाद से कई जिलों में मानसून कमजोर पड़ गया। जहां 1 जून से 5 अगस्त तक राज्य में 502 मिमी बारिश हुई जो औसत 515 मिमी से 3 प्रतिशत कम है, वहीं अगस्त के पहले सप्ताह में राज्य में मात्र 21 मिमी बारिश हुई जो औसत 58 मिमी से 64 प्रतिशत कम है। वहीं जिलावार अंाकड़ों में स्थिति और ज्यादा गंभीर है और उत्तर कर्नाटक के अधिकांश जिलों में औसत से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

औसत से कम बारिश होने के कारण इन जिलों में खरीफ फसलों की बुआई पर असर पड़ा है और जहां बुआई हुई वहां अब फसलों के बर्बाद होने का खतरा मंडराने लगा है। इसके अतिरिक्त प्रभावित जिलों के अधिकांश जलाशय और अन्य जलस्रोत अब तक पानी को तरस रहे हैं जो आने वाले महीनों में गंभीर जलसंकट का संकेत है। एक ओर अतिवृष्टि से प्रभावित जिलों में 2.16 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर सूखा संकट की ओर बढ़ते जिलों में अब लाखों हेक्टेयर में फसलें बर्बाद होने का डर है।

रायचूर, कलबुर्गी, विजयपुर, यादगीर, गदग, कोप्पल, कोलार, बीदर, बल्लारी आदि जिलों में औसत से कम बारिश हुई है। अगले एक सप्ताह के दौरान अगर बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इन जिलों के कई तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है। अपर्याप्त बारिश की मार झेल रहे जिलों की स्थिति की समीक्षा के लिए राज्य सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है और इस महीने के अंत तक राजस्व विभाग अपनी रिपोर्ट सौंप देगा, जिसके बाद जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का निर्णय लिया जाएगा। वहीं शिवमोग्गा, हासन, चिक्कमगलूरु, कोडुगू, दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़, उडुपी जैसे जिलों में सामान्य से कई गुणा ज्यादा बारिश होने से स्थिति गंभीर बनी हुई है।