
राज्य में 18 वर्ष वर्ष से कम आयु के 658 सहित कुल 2621 पंजीकृत मरीज हैं, जिन्हें समय पर उपचार मिलना कठिन था।
उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार D. K. Shivakumar ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुंडूराव की उपस्थिति में बुधवार को शहर के सी. वी. विश्वेश्वरैया सभागार में ‘कुसुम संजीविनी’ (हीमोफीलिया) कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके तहत हीमोफीलिया के मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि रक्त के थक्के जमने से जुड़ी यह दुर्लभ बीमारी मुख्यत: पुरुषों में अधिक पाई जाती है, जबकि महिलाएं इसके वाहक के रूप में अगली पीढ़ी तक इसे पहुंचाती हैं। राज्य Karnataka में 18 वर्ष वर्ष से कम आयु के 658 सहित कुल 2621 पंजीकृत मरीज हैं, जिन्हें समय पर उपचार मिलना कठिन था। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों को पढ़ाई और खेलकूद में कठिनाइयों के कारण मुख्यधारा से दूर होना पड़ता था। अब तक मरीजों को जीवन भर सप्ताह में 2-3 बार नसों के जरिए इंजेक्शन लेना पड़ता था, जो विशेषकर छोटे बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण था।
उन्होंने कहा, अब आधुनिक विज्ञान की देन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी आधारित नई दवा ‘एमिसिजुमैब’ उपलब्ध हुई है, जिसे त्वचा के नीचे दिया जाता है। इससे शारीरिक विकृति और अंग विकलांगता को रोका जा सकता है। मंत्री ने इसे मॉडर्न साइंस का चमत्कार बताया। महीने में एक बार इंजेक्शन लेने से मरीज सामान्य जीवन जी सकेंगे। अब तक 200 मरीजों पर इसका परीक्षण किया जा चुका है।
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 45,55,55,973 रुपए स्वीकृत किए हैं, जिनमें से 17 करोड़ रुपए नई दवा पर खर्च किए जा रहे हैं। प्रत्येक मरीज पर सालाना लगभग पांच लाख रुपए का खर्च आएगा। इसके अलावा, मरीजों की सुविधा के लिए 108 एंबुलेंस सेवा भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।
हीमोफीलिया Hemophilia एक दुर्लभ, आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे चोट लगने या सर्जरी के बाद ब्लीडिंग लंबे समय तक जारी रहती है। कुछ मामलों में बिना चोट के भी लगातार आंतरिक रक्तस्राव होता है।
Updated on:
26 Feb 2026 06:10 pm
Published on:
26 Feb 2026 06:09 pm
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