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जद (ध) के विधायकों की अयोग्यता का मसला: हाईकोर्ट ने किया दखल से इनकार

न्यायालय ने जनता दल (ध) के साथ असंतुष्ट विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने के मामले मेंं दखल करने से इनकार कर दिया है।

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जद (ध) के विधायकों की अयोग्यता का मसला:

बेंगलूरु. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जनता दल (ध) के साथ असंतुष्ट विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने के मामले मेंं दखल करने से इनकार कर दिया है। आगामी 23 मार्च को राज्यसभा की चार सीटों के लिए मतदान होगा और कोर्ट के इस नजरिए से इन विधायकों ने राहत की सांस ली है।


न्यायाधीश राघवेन्द्र चौहान ने हालांकि कहा कि जद (ध) के नाराज सदस्यों को विधानसभा के अध्यक्ष के सदस्यता से अयोग्य ठहराने की याचिका पर फैसला सुनाने के बाद कोर्ट के समक्ष आने का अधिकार है। वे जद (ध) के नेता बी.बी. निंगय्या द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। निंगय्या ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा फैसला सुनाने में अनावश्यक विलंब करने की बात कहते हुए न्यायालय से दखल की मांग की है।

इन सातों विधायकों ने पिछले राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करके कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। न्यायाधीश ने केस की सुनवाई को गुरुवार तक के लिए स्थगित करते हुए कहा कि न्यायालय को हालांकि विधानसभा के सदस्यों को सदस्यता से अयोग्य ठहराने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कोलीवाड़ को व्यक्तिगत तौर पर या वकील के जरिए गुरुवार को न्यायालय में पेश होने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने दोनों पक्षों की दलीलों की सुनवाई की है और कानूनन काम किया है, लिहाजा फैसला उन्हीं के द्वारा घोषित किया जाना चाहिए।


इससे पहले महाधिवक्ता मधुसूूदन नायक ने बुधवार सुबह स्पीकर के साथ बैठक की और एक मुंहरबंद लिफाफे में उनका जवाब प्राप्त किया। असंतुष्ट विधायकों की तरफ से पेश हुए वकील रवि वर्मा कुमार ने तर्क दिया कि चूंकि चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है, लिहाजा सदस्यता से अयोग्य ठहराने के बारे मेंं दायर की गई याचिका खारिज कर दी जानी चाहिए।


जद (ध) के वकील उदय होल्ला ने तर्क दिया कि यह याचिका पिछले दो सालों से स्पीकर के पास विचाराधीन पड़ी है और चूंकि 23 मार्च को चुनाव होने वाले हैं, लिहाजा फैसले की घोषणा की जानी चाहिए। इस बीच देवेगौड़ा से बातचीत करने की इच्छा जताने वाले एच.सी. बालकृष्णा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनकी सुनवाई दोबारा करने का अनुरोध किया है।

जद (ध) में वापसी का सवाल ही नहीं: जमीर
जद (ध) से निलंबित विधायक जमीर अहमद खान ने बुधवार को मैसूरु में संवाददाताओं के समक्ष जद (ध) में लौटने की संभावना को खारिज कर दिया और कहा कि वे 25 मार्च को मैसूरु में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल होंगे।

हाईकोर्ट से कोई निर्देश नहीं मिला: कोलीवाड़
विधानसभा अध्यक्ष के.बी. कोलीवाड़ ने स्पष्ट किया है कि विगत राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले जनता दल (ध) के सात विधायकों को सदस्यता से अयोग्य ठहराने के प्रकरण के संबंध में उनको हाईकोर्ट से कोई निर्देश नहीं मिला है। राज्य सरकार के महाधिवक्ता मधुसूदन नायक व अतिरिक्त महाधिवक्ता पोन्नण्णा के साथ इस मसले पर सलाह मशविरा करने के बाद कोलीवीड़ ने संवादादाताओं से बातचीत में कहा कि सात विधायकों को सदस्यता से अयोग्य ठहराने के मसले पर हाईकोर्ट से मौखिक या लिखित कोई निर्देश नहीं मिला है। इस मसले पर उन्होंने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और फैसला सुनाने का अधिकार उनके पास है।

उन्होंने कहा कि हम अपना काम संवैधानिक तरीके से कर रहे हैं। यह प्रकरण न्यायालय के दायरे में नहीं आता है और जद (ध) के विधायकों केे कहने मात्र से फैसला नहीं सुनाया जा सकता। कोलीवाड़ ने कहा कि एक तरफ जद (ध) ने सातों विधायकों को राज्यसभा के चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया है तो दूसरी तरफ उनको अपनी पार्टी का सदस्य नहीं बता रहे हैं। इनके बयान ही विवादास्पद हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता व जद(ध) के विधायक सी.एन. बालकृष्णा व बी.बी. निंगय्या के अलावा उन्होंने सातों विधायकों की दलीलें सुनी हैं।