
मानव का वाणी रूपी जहर लाइलाज
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, सिद्धार्थनगर सीआइटीबी परिसर में श्रुत मुनि ने कहा कि भगवान महावीर कहते हैं कि सर्प के दांत में जहर होता है, कुत्ते की दाढ़ में एवं बिच्छू की पुंछ में जहर होता है। इसे औषधि से मिटाया जा सकता है परन्तु मानव का वाणी रूपी जहर लाइलाज है।
उन्होंने कहा कि यदि हृदय में दया और प्रेम का अमृत हो तो वाणी रूपी जहर भी अमृत में प्रवर्तित हो जाता है।
शास्त्रों में मानव को अमृत पुरुष की संज्ञा दी गई है। अमृत रूपी बनने के लिए मानव का हृदय दयालु होना चाहिए। ठाणांग सूत्र में हृदय के चार प्रकार- संकुचित, अनुदार, उदार, विशाल बताए गए हैं। मनुष्य को अपने जीवन में समस्त गुणों का समावश करते हुए हृदय में अमृत का भरण करना चाहिए। हृदय का द्वार खोलना चाहिए। अक्षर मुनि ने नवग्रह जाप का अनुष्ठान कराया।
अज्ञान व अंधकार के मेटनहार थे भगवान महावीर
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में सिटी स्थानक में डॉ समकित मुनि ने तिरंगा जप अनुष्ठान के अंतर्गत कहा कि समवसरण के अधिकारी भगवान महावीर अज्ञान व अंधकार के मेटनहार थे। शूलपाणि को फूलपाणि बनाया। चण्डकौशिक को विषधर से अमृत का स्रोत बनाया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर एक यशस्वी परमात्मा हैं। सर्वोत्तम महापुरुष हैं। निष्कलंक चरित्र और अप्रतिबद्ध विहारी हैं। तीर्थंकर भगवान अनंतबली होते हैं। वे मुनियों के सर्वोपरि महापुरुष होते हैं। वे अनंत आत्माओं के लिए मार्गदर्शक, दिग्दर्शक, तारणहार, तीर्थ स्थापक, अनंत ज्ञानी होते हैं। संघ अध्यक्ष कैलाशचंद बोहरा ने स्वागत किया।
क्षमा याचना दिवस मनाया
मंड्या. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में स्वाध्यायी नवरत्नमल के सान्निध्य में क्षमा याचना दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन में गलती अवश्य करता है। गलती करने पर स्वीकार कर क्षमा याचना करे तो आत्मा भी चीर गति की ओर अग्रसर होती है। दलपत सिंघवी और भरत सांखला ने कहा कि मन में कभी किसी के प्रति राग व द्वेष भाव नहीं रखें। नैत्रा शाह ने 8 उपवास किए। समाज के अध्यक्ष मदनलाल दलाल ने तपस्वियों का स्वागत किया। मंत्री शांति लाल कावडिय़ा, अशोक बालर, मनोहर लाल गांधी आदि ने विचार व्यक्त किए।
Published on:
18 Sept 2018 05:44 pm
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