
अनिश्चितकालीन धरना: मुख्यमंत्री ने दिए समस्या समाधान के निर्देश
बेंगलूरु. समाज कल्याण विभाग व राजकीय विद्यालयों के विभिन्न छात्रावासों में बाहरी ठेके पर कार्य कर रहे करीब 15 हजार से अधिक बावर्ची और सहायकों को हटाने के विरोध में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। विभिन्न जिलों से आए बावर्चियों व सहायकों ने रात फ्रीडम पार्क में गुजारी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि काम छूटने से 15 हजार परिवार सड़क पर आ गए और सरकार अब तक मौन है।
प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद स्वामी ने बताया कि गुरुवार शाम को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक राज्य गवर्नमेंट हॉस्टल एंड क्राइस्ट स्कूल आउटसोर्स यूनियन के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया था।
मुख्यमंत्री ने बेरोजगार हुए लोगों के प्रति सहानुभूति जताई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये निर्णय उनका नहीं पूर्ववर्ती सरकार का है और वे भी इससे सहमत नहीं हैं। कैबिनेट की अगली बैठक में इस मामले के समाधान का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण मंत्री प्रियांक खरगे व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री सी पुटï्टरंगा शेट्टी को इस मामले की जांच कर समस्या समाधान के निर्देश भी दिए हैं।
स्वामी ने पत्रिका से कहा कि जब तक सभी कर्मचारियों को वापस काम पर नहीं रख लिया जाता है। तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इससे पूर्व धरना स्थल पर शुक्रवार को आयोजित सभा को अनेक कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया।
उनका कहना था कि वे 10-15 वर्ष से काम कर रहे हैं। अचानक सरकार ने गत 20 जून को सबको हटा दिया। इससे उनके परिवारों के भरण पोषण का संकट हो गया है। सरकार अब नए ठेकेदार को नियुक्त करना चाहती है। इसे लेकर वे तहसील व जिला मुख्यालयों पर धरना व प्रदर्शन कर उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
खुले में गुजारी रात
राज्य के विभिन्न जिलों से बुधवार रात को ही काफी संख्या में महिला व पुरुष कुक तथा सहायक बेंगलूरु के फ्रीडम पार्क पहुंच गए थे। सभी कर्मचारियों ने खुले में रात गुजारी। सुबह नित्य कर्म के लिए मैजेस्टिक स्थित शौचालय व स्नानागार का सहारा लेना पड़ा।
अधिकांश महिलाएं प्रभावित
बावर्ची व सहायकों में अधिकांश महिलाएं हैं। इनमें भी अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ, विधवा, परित्यक्ता महिलाएं अधिक हैं। ऐसे में उनका रोजगार छिनने से उनके सामने संकट हो गया है। इन महिलाओं का परिवार इसी रोजगार पर निर्भर था। सरकार ने ये निर्णय कर गरीब बेसहाराओं के हितों पर कुठाराघात किया है।
बच्चे भी साथ हैं
अनेक महिलाएं तो छोटे बच्चों को लेकर धरना देने पहुंची हैं। उनको धरने के दौरान कई बार बच्चों के लिए खाने की सामग्री जुटाते देखा जा सकता है।
Published on:
29 Jun 2018 08:36 pm
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