
अंतरिक्ष में इसरो का अनूठा मिशन
बेंगलूरु. प्रक्षेपण क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (इसरो) दूसरी बार लंबी अवधि के अनूठे मिशन को अंजाम देगा। लगभग 1 घंटे 12 मिनट के इस मिशन के दौरान पीएसएलवी सी-43 रॉकेट कुल 31 उपग्रहों के साथ उड़ान भरेगा और उन्हें पृथ्वी की दो अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करेगा। यह एक बेहद जटिल तकनीक है जिसमें इसरो ने महारत हासिल की है और इसके लिए पीएसएलवी के चौथे चरण का इंजन दो बार स्विच ऑफ एवं स्विच ऑन किया जाएगा।
इसरो ने कहा है कि पीएसएलवी सी-43/हायसिस मिशन के तहत देश के पहले हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह के साथ 30 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण 29 नवंबर की सुबह 9.57 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लांच पैड से किया जाएगा। इसके लिए 28 घंटे की उलटी गिनती बुधवार सुबह 5.57 बजे शुरू होगी। इस मिशन के दौरान पीएसएलवी हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह (हायसिस) को 6 36 किलोमीटर ऊपर धु्रवीय सूर्य समकालिक कक्षा (पोलर एसएसओ) में स्थापित करेगा। प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट 35 सेकंड बाद हायसिस अपनी कक्षा में स्थापित होगा। इसके बाद 30 अन्य उपग्रहों को पृथ्वी की 504 किलोमीटर वाली कक्षा में भेजा जाएगा। ये उपग्रह प्रक्षेपण के 1 घंटे 12 मिनट बाद अपनी-अपनी कक्षा में जाएंगे। ये उपग्रह ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड, स्पेन और अमरीका के हैं। इसमें अमरीका के ही 23 उपग्रह हैं जबकि बाकी देशों के एक-एक उपग्रह हैं। इनमें से 1 सूक्ष्म जबकि 29 नैनो उपग्रह हैं और इनका सम्मिलित भार 26 1.5 किलोग्राम है। मिशन का मुख्य पे-लोड भारतीय उपग्रह हायसिस है जिसका भार 38 0 किलोग्राम है।
यह है हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह
हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह एक विशेष चिप की मदद से तैयार किया जाता है जिसे तकनीकी भाषा में 'ऑप्टिकल इमेजिंग डिटेक्टर ऐरेÓ कहते हैं। इस उपग्रह से धरती के चप्पे-चप्पे पर नजर रखना आसान हो जाएगा क्योंकि लगभग धरती से 6 30 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष से पृथ्वी पर मौजूद वस्तुओं के 55 विभिन्न रंगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग या हाइस्पेक्स इमेजिंग की एक खूबी यह भी है कि यह डिजिटल इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी की शक्ति को जोड़ती है।
हाइस्पेक्स इमेजिंग अंतरिक्ष से एक दृश्य के प्रत्येक पिक्सल के स्पेक्ट्रम को पढऩे के अलावा पृथ्वी पर वस्तुओं, सामग्री या प्रक्रियाओं की अलग पहचान भी करती है। इस उपग्रह से पृथ्वी के दैनिक इस्तेमाल में आनेवाले विभिन्न कार्यों को बेहतर ढंग से अंजाम दिया जा सकेगा। इस उपग्रह के ऑपरेशनल होने के बाद विशेष रूप से कृषि क्षेत्र व सेना को काफी लाभ होगा। इससे पर्यावरण सर्वेक्षण, फसलों के लिए उपयोगी जमीन का आकलन, तेल और खनिज पदार्थों की खानों की खोज आसान होगी।
Published on:
28 Nov 2018 07:31 pm
