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जिनवाणी से खत्म होते हैं राग, द्वेष

प्रात: बैंड बाजे के साथ मंदिर से सामैया लेकर पहुंचे

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जिनवाणी से खत्म होते हैं राग, द्वेष

बेंगलूरु. चिकपेट स्थित आदिनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में पंन्यास प्रवर कल्परक्षित विजय आदि ठाणा, साध्वी संवेगरत्नाश्री आदि ठाणा का चातुर्मास प्रवेश भव्य रूप से किया गया। प्रात: बैंड बाजे के साथ मंदिर से सामैया लेकर पहुंचे, वहां से चातुर्मास का वरघोड़ा शुरू हुआ, जो मुख्य मार्ग से होते हुए मंदिर प्रांगण पहुंचा।

यहां विधि विधान से प्रवेश कराया। मंदिर में दर्शन, वंदन के बाद आचार्य जिनसुंदर सूरीश्वर ने मंगलाचरण करते हुए कहा कि राग, द्वेष को खत्म करने की ताकत जिनवाणी रखती है। इसलिए प्रतिदिन जिनवाणी का श्रवण करें।

विजयलब्धि संगीत मंडल ने स्वागत गीत पेश किया। बाबूलाल पारेख ने स्वागत किया। पंन्यास प्रवर ने कहा कि चातुर्मास कषायों की निर्जरा व आत्मा के मैल धोने का अवसर है। प्रकाश राठौड़, गौतम सोलंकी ने भी विचार रखे। इस अवसर पर शांतिलाल नागौरी, दीपचंद चौहान, देवकुमार के जैन, कांतिलाल तुलेसावोरा आदि उपस्थित थे।

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जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में जयधुरन्धर मुनि आदि का चातुर्मास मंगल प्रवेश

बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में जयधुरन्धर मुनि, जयकमलश मुनि, जयपुरन्दर मुनि आदि ठाणा 3 ने शनिवार को जय परिसर महावीर धर्मशाला में चातुर्मास मंगल प्रवेश किया। अरिहंत शंखेश्वर अपार्टमेंट से शोभायात्रा शुरू होकर चातुर्मास स्थल पहुंचकर सभा में बदल गई। सभा में जयधुरन्धर मुनि ने कहा कि मंगल दिवस की मंगल बेला में हुए मंगल प्रवेश से सर्वत्र मंगल होते हुए विघ्नों का नाश होता है। प्रवेश चाहे लौकिक क्षेत्र में हो अथवा लोकोत्तर क्षेत्र में, प्रसन्नता का विषय है।

बहु मंडल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। महिला मंडल ने गीतिका पेश की। अमरचंद चोरडिय़ा व चेतन प्रकाश डंूगरवाल ने भी विचार व्यक्त किए। संघ अध्यक्ष मीठालाल मकाणा ने बताया कि चातुर्मास प्रवचन 27 जुलाई से शुरू होंगे। संयोजक चैनराज गोटावत ने अधिकाधिक लोगों से चातुर्मास का लाभ लेने का आह्वान किया।

अखिल भारतीय जयमल जैन श्रावक संघ के राष्ट्रीय महामंत्री विमलचंद सांखला, चेन्नई से मूलचंद मेहता, मांगीलाल कोठारी, यादगिरि से गौतमचंद धोका, बागलकोट से अजितकुमार बेताला आदि उपस्थित थे। संचालन मनोहरलाल डूंगरवाल ने किया। बेंगलूरु के उपनगर अलसूर, जयनगर, हनुमंतनगर, चामराजपेट, चिकपेट से श्रावक शामिल हुए।