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नाडगीते की ‘समयावधि व तर्ज’ निर्धारित करेगी कन्नड़ साहित्य परिषद

विभिन्न सरकारी समारोह के आरंभ में यह गीत गाया जाता है, लेकिन इस गीत को गाने की समयावधिक व तर्ज तथा समय को लेकर विवाद चल रहा है।

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नाडगीते की 'समयावधि व तर्ज' निर्धारित करेगी कन्नड़ साहित्य परिषद

बेंगलुरु. ज्ञानपीठ पुरस्कार से पुरस्कृत डॉ. के.वी. पुट्टप्पा (कुवेंपु) रचित 'जय भारत जननीय तनुजाते, जय हे कर्नाटक माते' गीत को राज्य सरकार ने नाडगीते (राजकीय गीत) के रूप में मान्यता दी है। विभिन्न सरकारी समारोह के आरंभ में यह गीत गाया जाता है, लेकिन इस गीत को गाने की समयावधिक व तर्ज तथा समय को लेकर विवाद चल रहा है। काफी दिनों से विवाद चल रहा है।

इस विवाद को सुलझाने के लिए कन्नड़ साहित्य परिषद ने 14 नवंबर को राज्य के प्रमुख साहित्यकारों की बैठक बुलाई है। साहित्य परिषद के अध्यक्ष मनू बलिगार के मुताबिक बैठक में नाडगीते की तर्ज तथा इसके गायन में लगने वाले समय की अवधि तय की जाएगी।

अभी यह गीत अलग-अलग तर्जों में गाया जा रहा है, जिसके कारण इस गीत को गाने के लिए कभी कभी 5 मिनट से भी अधिक समय लग रहा है। इसलिए इस गीत के लिए राष्ट्रगान की तरह एक समान तर्ज तथा समय निर्धारित कर बैठक में पारित प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा।


कन्नड़ भाषा के 'कल, आज और कल' पर विचार संगोष्ठी कल
बेंगलूरु. शिवानंद चौराहे के निकट स्थित गांधी भवन के सभागार में सुबह 10 बजे सपना बुक हाउस की ओर से कन्नड़ राज्योत्सव के उपलक्ष्य में 'कन्नड़ अंदू इंदू मंदू' अर्थात कन्नड़ के 'अतीत, वर्तमान तथा भविष्य' विषय को पर विचार संगोष्ठी होगी। किताब घर के निदेशक नितिन शाह ने यह जानकारी दी। मंगलवार को उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का उद्घाटन ज्ञानपीठ पुरस्कृत लेखक डॉ. चंद्रशेखर कंबार करेंगे।

अध्यक्षता कवि के. एस. निसार अहमद करेंगे। कन्नड़ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. एस.जी. सिद्धरामय्या तथा कन्नड़ पुस्तक प्राधिकरण की अध्यक्ष डॉ. वसुंधरा भूपति कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। साहित्यकार प्रो. दोड्डरंगेगौड़ा ने कहा कि युवाओं में कन्नड़ साहित्य के प्रति रुचि कम होना चिंताजनक है। साहित्य के निरंतर अध्ययन से ही हमारे व्यक्तित्व का विकास होता है। साहित्यकार एच.पी. नागराजय्या उपस्थित थे।