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केएमआइओ नहीं कर पा रहा कैंसर रोगी निधि का इस्तेमाल

निदेशक ने कहा, नहीं पड़ती जरूरत

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केएमआइओ नहीं कर पा रहा कैंसर रोगी निधि का इस्तेमाल

बेंगलूरु. स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी निधि (एसएमसीपीएफ) के इस्तेमाल में किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (केएमआइओ) देश के अन्य राज्यों से काफी पीछे है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में केएमआइओ ने 50 लाख रुपए में से 20 लाख रुपए का ही इस्तेमाल किया। जबकि मध्यप्रदेश ने 2.9 करोड़ रुपए, असम ने 1.3 करोड़ रुपए, उत्तर प्रदेश ने 1.3 करोड़ रुपए व तमिलनाडु ने 1.2 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया। केएमआइओ प्रबंधन की मानें तो हजारों की संख्या में मरीज होने के बावजूद उनके पास कोष की कोई कमी नहीं है। इसलिए एसएमसीपीएफ की जरूरत नहीं पड़ती है।

उदाहरण के लिए गत कई वर्षों से 90 फीसदी से ज्यादा जरूरतमंद मरीजों ने वाजपेयी अरोग्यश्री योजना के तहत 1.5 लाख रुपए तक की राशि लाभ उठाया है। अनुसूचित जाति और जनजाति कोष के तहत दो से चार करोड़ रुपए उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष और बाल कल्याण कोष से भी सहायता मिलती है। केएमआइओ के निदेशक डॉ. रामचंद्र सी ने बताया कि अस्पताल के पास इतने जरूरतमंद मरीज हैं कि केंद्र से एक करोड़ रुपए से ज्यादा राशि मांगी जा सकती है। लेकिन यह राशि देर से स्वीकृत होती है या फिर होती ही नहीं है। सरकारी अनुदान व अन्य दानदाताओं से पर्याप्त फंड की व्यवस्था हो जाती है।

कैंसर पीडि़त निर्धन मरीजों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री कैंसर रोगी निधि (एसएमसीपीएफ) की स्थापना वर्ष 2009 में हुई। इसके लिए 100 करोड़ रूपए की कोष निधि रखी गई है, जो सावधि जमा के रूप में है। इससे प्राप्त ब्याज का उपयोग वित्तीय सहायता देने के लिए किया जाता है। 27 क्षेत्रीय कैंसर केन्द्रों में उपचार प्राप्त कर रहे गरीबी रेखा से नीचे के कैंसर मरीजों को वित्तीय सहायता दी जाती है।

प्रत्येक मामले में 2 लाख रुपए तक के उपचार हेतु वित्तीय सहायता देने के लिए 27 केंद्रों के अधिकार में 50 लाख रुपए तक की परिक्रमी निधि स्थापित की गई है। जबकि 2 लाख रुपए से अधिक के उपचार में निधियां प्रदान करने के लिए मामले को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजा जाता है।