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श्रम विभाग का दावा : इंफोसिस की छंटनी कानून का उल्लंघन नहीं, असफल प्रशिक्षुओं को निकाला

कर्नाटक श्रम विभाग ने एक रिपोर्ट में राज्य सरकार को बताया है कि आईटी दिग्गज इंफोसिस ने अपने मैसूरु परिसर में कर्मचारियों की बर्खास्तगी के मामले में किसी भी श्रम कानून का उल्लंघन नहीं किया है। अंतिम रिपोर्ट 4 या 5 मार्च तक आएगी, जिसकी एक प्रति केंद्रीय श्रम विभाग को भी भेजी जाएगी।

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कर्मचारी नहीं केवल तीन महीने वजीफा लेकर प्रशिक्षु रहे

बेंगलूरु. कर्नाटक श्रम विभाग ने एक रिपोर्ट में राज्य सरकार को बताया है कि आईटी दिग्गज इंफोसिस ने अपने मैसूरु परिसर में कर्मचारियों की बर्खास्तगी के मामले में किसी भी श्रम कानून का उल्लंघन नहीं किया है। अंतिम रिपोर्ट 4 या 5 मार्च तक आएगी, जिसकी एक प्रति केंद्रीय श्रम विभाग को भी भेजी जाएगी।

श्रम मंत्री संतोष लाड के आदेश पर अतिरिक्त श्रम आयुक्त (औद्योगिक संबंध) जी मंजूनाथ के नेतृत्व में श्रम विभाग की टीम ने इंफोसिस के मैसूरु और बेंगलूरु दोनों परिसरों का दौरा करके बर्खास्तगी की समीक्षा की। हालांकि, उन्हें कोई श्रम कानून उल्लंघन नहीं मिला, क्योंकि उनके बीच कोई कर्मचारी और नियोक्ता संबंध नहीं था र्आैर उन्हें नियुक्ति पत्र भी नहीं दिए गए थे।

जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में एक अनाम सरकारी अधिकारी का हवाला देकर कहा गया है कि इसके बजाय वे तीन महीने के लिए प्रशिक्षु थे, जिन्हें वजीफा दिया गया था और वे प्रशिक्षु कार्यक्रम का हिस्सा थे।

अधिकारी ने यह भी कहा कि सरकार किसी भी कंपनी की चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। सरकारी निरीक्षण में पाया गया कि कुल 329 छात्र परीक्षा पास नहीं कर सके, लेकिन उसी 2022 बैच के 600 से अधिक छात्र आगे बढ़ गए हैं।

यह सब इंफोसिस द्वारा ढाई साल पहले ऑन और ऑफ-कैंपस दोनों से काम पर रखे गए सैकड़ों प्रशिक्षुओं को समाप्त करने के बारे में है, लेकिन पिछले अक्टूबर में ही उन्हें शामिल किया गया था। कंपनी ने कहा कि वे एक आंतरिक मूल्यांकन कार्यक्रम को पास करने में विफल रहे थे।