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बाहुबली स्वामी के समक्ष विधान

मस्तकाभिषेक समापन की ओर है

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बाहुबली स्वामी के समक्ष विधान

श्रवणबेलगोला. विंध्यगिरि पर्वत पर भगवान बाहुबली स्वामी की विशाल प्रतिमा के समक्ष प्रज्ञासागर मुनि के सान्निध्य में एवं प्रतिष्ठाचार्य कुमुद सोनी के निर्देशन में बाहुबली विधान किया गया। स्वस्ति चारुकीर्ति स्वामी के नेतृत्व में नियमित विधान में त्रिकुट जिनालय में भी सिद्धचक्र महामंडल विधान हुआ। विंध्यगिरि में बाहुबली विधान आराधना में दाहोद, बरोड़ा, पोर सूरत से आए बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। इस मौके पर प्रज्ञासागर मुनि ने कहा कि आज देश की निगाह श्रवणबेलगोला की तरफ है। भक्तों के आने का क्रम जारी है। मस्तकाभिषेक समापन की ओर है।
श्रद्धालुओं के उत्साह के मद्देनजर स्वस्ति चारुकीर्ति ने मस्तकाभिषेक के समापन की तारीख 15 दिन आगे बढ़ा दी है। इसके चलते बाहुबली विधान के माध्यम से जय जय मंगल महोत्सव का आगाज कर रहे हैं।


तीर्थ रक्षा श्रावक का परम कर्तव्य
बेंगलूरु. सीमंधर शांतिसूरी जैन ट्रस्ट, वीवीपुरम के तत्वावधान में आचार्य चंद्रभूषण सूरी ने कहा कि अंतरिक्ष पाŸवनाथ तीर्थ कई सालों से विवाद में डटा हुआ है। हर जैनी का कर्तव्य है कि तीर्थ की रक्षा का प्रण ले। उन्होंने कहा कि पूर्व काल में कई साधु एवं श्रावकों ने तीर्थ रक्षा, शासन रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इसलिए जिनशासन की धरोहर की रक्षा करना अपना उत्तरदायित्व है। अंतरिक्ष पाŸवनाथ तीर्थ की रक्षा एवं अभ्युदयार्थ सामूहिक अ_म तप एवं भाष्यजाप का त्रिदिवसीय आयोजन किया गया। अ_म तप एवं जाप की सामूहिक आराधना तीर्थ की रक्षा में बल उजागर करेंगी। सूक्ष्म भावों की ताकत होती है कि वह आने वाले अवरोधों को मार गिराए।

महाशक्ति का पुंज है अल्पवचन
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि अल्पवचन महाशक्ति का पुंज होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जितना कम बोलता है उसकी वाणी की शक्ति उतनी ही बढ़ती है, तथा ऐसे व्यक्ति के मुख से निकला हुआ हर एक वचन पत्थर की लकीर बन जाता है। यही नही,ं जो व्यक्ति कम बोलता है उसके वचनों पर सरस्वती माता विराजमान होती है।