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कलश की तरह हो जीवन

शरीर में आत्मा का वास नहीं हो तो वह भी अशुभ है

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कलश की तरह हो जीवन

मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर में श्रुत मुनि ने कहा कि मनुष्य के मंगल की साधना करने तथा मंगल शुद्धि करने से आंतरिक आत्मा जाग्रत हो जाए तो जीवन में कष्ट व दुख स्वत: खत्म हो जाते हैं। अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।

शास्त्रकार कहते हैं कि शरीर को भी कलश की तरह बनाना चाहिए। शरीर को कभी खाली नहीं रखना चाहिए। शरीर में आत्मा का वास नहीं हो तो वह भी अशुभ है। सम्पत मुनि के पुण्य दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संघ अध्यक्ष सम्पत कोठारी ने बताया कि रविवार को जीवदया एवं शिविर का आयोजन होगा।


जीव-अजीव के भेद समझाए
बेंगलूरु. तेरापंथ युवक परिषद राजाजीनगर के तत्त्वावधान में तेरापंथ सभा भवन में चल रही जैन विद्या कार्यशाला में 25 बोल पर निर्धारित विषय जीव-अजीव का विश्लेषण किया गया। प्रशिक्षक जुगराज श्रीश्रीमाल ने चौदहवां बोल नौ तत्त्व के 115 भेद में 4 तत्त्व जीव के 14 भेद, अजीव के 14 भेद, पुण्य के 9 भेद एवं पाप के 18 भेद समझाए। महिला मंडल अध्यक्ष मंजू गन्ना, तेयुप अध्यक्ष चंद्रेश मांडोत व श्रावक उपस्थित रहे। कार्यशाला 17 अगस्त तक चलेगी।


जीवन को जीवंत बनाती हैं चुनौतियां
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षीज्योति ने कहा कि चुनौतियां हमारे जीवन को जीवंत बनाती हंै। चुनौतियों को देखकर अगर हम घबरा जाते हैं और मैदान को छोड़कर बाहर आ जाते हैं तो विकास का सफर पूरा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि जीवन के सफर में सुख और दुख दोनों साथ-साथ चलते हैं। कभी दुख की रेखाएं मन को दबाने लगे तो मन को कमजोर न होने दें। धैर्य, साहस और समझदारी से आगे बढ़ते रहें। यह बात याद रखनी चाहिए कि रोने से दुख कम नहीं होता है। बल्कि रो रोकर हम अपने दुख को और बढ़ा लेते हैं। जीवन एक चुनौती है। सभा में रूप मुनि और विनय मुनि के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए महामंत्र नवकार जाप किया गया।