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जिनवाणी सुनने से जीवन में विनय आता है- साध्वी सुप्रिया

धर्मसभा का आयोजन

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जिनवाणी सुनने से जीवन में विनय आता है- साध्वी सुप्रिया

जिनवाणी सुनने से जीवन में विनय आता है- साध्वी सुप्रिया

बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में विराजित साध्वी सुमित्रा के सान्निध्य में साध्वी सुप्रिया ने कहा कि जिनवाणी अनंत सुखों को प्रदान करने वाली है। जिनवाणी सुनने से जीवन में विनय आता है, विवेक आता है और व्यवहार आता है। तन का रोग मिटाने के लिए औषधि की जरूरत पड़ती है, मन का रोग मिटाने के लिए समाधि की जरूरत पड़ती है और भव को मिटाने के लिए जिनवाणी की जरूरत पड़ती है। परमात्मा की वाणी हमारे राग द्वेष के कांटो को निकाल कर हमें वेदना से रहित कर देती है। पाप के कार्य अशांति देने वाले होते हैं, वेदना देने वाले होते हैं। सुनते सभी हैं लेकिन सुनकर जो अपने जीवन को तारते हैं वह सुनना, सुनना है। ऐसा सुनना हमारे जीवन को ख़ुशहाल कर देता है। जिनवाणी, जिस वाणी को सुनकर लाखों लोग सम्यक दर्शन लाभ करते हैं, जिसे सुनकर महाव्रती बन जाते हैं। अगर हम भी अपना कल्याण करना चाहते हैं तो भगवान की वाणी पर श्रद्धान करे, ज्ञान करे और जीवन में उतारने का प्रयास करें। साध्वी सुमित्रा ने आयंबिल तप करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा जैन धर्म में आयंबिल तप का विशिष्ट स्थान है। बाकी के तप तो अन्य धर्मों में भी होते हैं, लेकिन आयंबिल तप किसी भी अन्य धर्म में नहीं होता है। साध्वी सुविधि ने स्तवन की प्रस्तुति दी। संचालन किशोर दलाल ने किया। आभार भंवरीलाल चोरडिय़ा ने जताया।