
वासना को उपासना में बदलती है तपस्या
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ राजाजीनगर में आयोजित धर्मसभा में साध्वी संयमलता ने कहा कि तपस्या वासना को उपासना में बदलती है। मन को मनस्वी एवं तन को तेजस्वी बनाकर तपस्वी तपसाधना करते हैं। तप मनुष्य की क्षमता को निखारता है। सभी ऋद्धि सिद्धि का मूल है तप। संसार में सफलता उसी को मिलती है जो अपनीवृत्तियों पर नियंत्रण करना जानते हैं। जो तपते हैं उसी के कर्म खपते हैं।
साध्वी अमितप्रज्ञा एवं साध्वी कमलप्रज्ञा ने मंत्र का सामूहिक गान करवाया। इससे पूर्व जवेरीलाल पालरेचा, गुलाब पगारिया, हीरालाल पालरेचा, अमृत ढालावत, बाणावार महिला मंडल ने जोड़े से कलश स्थापना की। रेखा सिंघवी के मासखमण तप के उपलक्ष्य में संघ की ओर से सम्मान किया गया। ममता बागरेचा ने दर्शन प्रवचन का लाभ लिया। संघ मत्री ज्ञानचंद लोढ़ा ने बताया कि शुक्रवार को भगवान पाŸवनाथ मां पद्मावती एकासन का आयोजन होगा।
जिनचंद्र सूरी एक स्वर्णिम शिलालेख
बेंगलूरु. साध्वी प्रियरंजना ने कहा कि दादा जिनचन्द्र सूरी एक ऐसा स्वर्णिम शिलालेख हैं जो काल के थपेड़ों से घिस नहीं सकते हैं। मात्र 9 वर्ष की उम्र में दीक्षित होकर 17 वर्ष की उम्र में आचार्य पद के निर्वहन में समर्थ हो गए। यह गुरुकृपा का ही परिणाम था। उस युग का क्रांतिकारी करम क्रियोद्धार का जो महत्वपूर्ण स्वप्र गुरु का था। वह शिष्य की एकनिष्ठ श्रद्धा और संकल्प के बल से साकार किया। जैन ग्रंथ और जैन तीर्थ भारतीय संस्कृति के प्राण हैं। जिनचन्द्र सूरी की पुण्य तिथि के उपलक्ष्य में गुरुवार को खरतर गच्छ संघ के तत्वा वधान में कार्यक्रम हुए।
जीवन में अपनाएं अणुव्रत अनुशासन
मैसूर. शहर के तेरापंथ भवन में आयोजित अणुव्रत सप्ताह के अन्तर्गत अणुव्रत अनुशासन विषय पर साध्वी लब्धिश्री ने दैनांदिक जीवन में आनेवाली चुनौतियों से निपटने में अनुशासन एवं अणुव्रत के उपयोग पर उद्बोधन दिया। साध्वी हेमायशश्री, आराधना, ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रकाश दक ने भी विचार व्यक्त किए। अणुव्रत समिति के अध्यक्ष मदनलाल मारु, महिला मंडल अध्यक्ष वनमाला नाहर समेत कई लोग उपस्थित रहे।
Published on:
28 Sept 2018 05:01 pm
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