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समाज को जगाने के लिए महाशतावधान जरूरी

घड़तर के बाद उसकी पहचान होती है, तब जाकर प्रतिभाशाली बनते हैं

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समाज को जगाने के लिए महाशतावधान जरूरी

बेंगलूरु. वासुपूज्य स्वामी जैन श्वेताम्बर मूर्तिपजूक संघ अक्कीपेट में आचार्य नयचंद्रसागर सूरीश्वर, मुनि अजित चंद्र सागर, मुनि पद्मचंद्र सागर की निश्रा में महाशतावधान कार्यक्रम के बारे में चर्चा की गई। कर्नाटक स्टेट लैण्ड कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक मुकेश जैन ने इस बारे में चर्चा की। आचार्य ने कहा कि तन मन से बालक बालक होता है। घड़तर के बाद उसकी पहचान होती है, तब जाकर प्रतिभाशाली बनते हैं।

उन्होंने कहा कि उनके चौबीसा शिष्यों में पांच शिष्य शतवाधानी व महाशतावधानी हैं एवं अजितचंद्र सागर अद्र्ध शहस्त्र शतवाधानी है। आचार्य ने बताया कि बाल मुनियों ने आठ से दस वर्ष की उम्र में संयम ग्रहण किया और आज प्रतिभा बनी है। मुनि अजित चंद्रसागर ने कहा कि समाज को जगाने के लिए महाशतावधान जरूरी है। इस मौके पर अध्यक्ष उत्तमकरण, कैलाश सकलेचा, देवकुमार के जैन, आदि उपस्थित थे।


महाशतावधान 2 सितंबर को
बेंगलूरु. वासुपूज्य स्वामी जैन संघ अक्कीपेट में आचार्य नयचंद्र सागर सूरीश्वर एवं मुनि अजितचंद्र सागर की प्रेरणा में महाशतावधान आयोजक समिति और अक्कीपेट संघ के तत्वावधान में 2 सितम्बर को पैलेस ग्राउण्ड में महाशतावधान का आयोजन होगा। जीतो बेंगलूरु के चेयरमैन पारस भंडारी ने बताया कि अक्कीपेट संघ में विराजित बाल शतावधानी सम्मान से विभूषित बाल मुनि पद्मप्रभ चंद्र सागर के सान्निध्य में शतावधान आयोजन होगा। संघ अध्यक्ष उत्तमकरण संचेती ने बताया कि दक्षिण भारत में पहली बार होने वाले इस आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं। सफल आयोजन के लिए समितियां गठित कर जिम्मेदारियां सौैंपी गई हैं।

प्रभु जन-जन के हृदय में विराजमान
बेंगलूरु. सीमंधर शांति सूरी जैन ट्रस्ट, वीवीपुरम के तत्वावधान में आचार्य चंद्रभूषण सूरी की निश्रा में अंतरिक्ष पाŸवनाथ तीर्थ की रक्षा एवं अभ्युदयार्थ त्रिदिवसीय उपवास का आयोजन हुआ। पहले दिन प्रवचन मंडप में पाŸवनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान कर अंतरिक्ष पाŸवनाथ तीर्थ रक्षा का संकल्प कर भाष्यजाप किए गए। आचार्य ने कहा कि दुनिया में जन जन के हृदय में पाŸवनाथप्रभु विराजमान है। उनकी साधना करने से सिद्धि जल्दी प्राप्त होती है। उनकी स्तवना करने वाले खुद स्तपनीय बन जाते हैं। उनकी पूजा करने वाले खुद पूजनीय बन जाते हैं। वैसे अंतरिक्ष पाŸवनाथ भगवान की प्रतिमा आज भी जमीन से ऊपर है।