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सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में हुआ मणिभद्र वीर महापूजन

प्रात: शुभ वेला में कुंभ स्थापना, दीपक स्थापना व नवाग्रहादि पाटला विधान हुआ

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सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में हुआ मणिभद्र वीर महापूजन

बेंगलूरु. सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर, प्रवर्तक कलापूर्ण विजय की निश्रा में प्रथम तीर्थ स्थापित जिनालय सन्मुख मणिभद्र वीर महापूजन आनंद पूर्वक संपन्न हुआ। प्रात: शुभ वेला में कुंभ स्थापना, दीपक स्थापना व नवाग्रहादि पाटला विधान हुआ।

इसके बाद मणिभद्र वीर के दूध, दही, घी, सर्वोषधि, तीर्थजल से पांच महाभिषेक हुआ। बाद में अष्ट प्रकारी पूजा व हवन विधान हुआ। आचार्य ने कहा कि मणिभद्र वीर तपागच्छ के अधिष्ठायक देव हैं। जिनशासन के प्रभावक कार्यों में सदैव सहायता करते हैं। आराधना में भक्तों का तांता लगा रहा। मालूर जैन संघ में जिनालय निर्माण की उद्घोषणा हुई। चातुर्मास पश्चात अंजनशलाका प्रतिष्ठा का मुहूत्र्त प्रदान किया जाएगा। विधि-विधान विपिनभाई व संगीत कमलेश एण्ड पार्टी ने पेश किया।


बच्चों ने सीखे संस्कार
बेंगलूरु. हनुमंतनगर संघ के तत्वावधान में चल रहे पांच दिवसीय धार्मिक बाल संस्कार शिविर के दूसरे दिन शनिवार को साध्वी सुप्रिया ने कहा कि संस्कार ही जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। बच्चों का मन एक कोरी स्लेट के समान होता है। आप उनमें जो संस्कारों के चित्र उकेरेंगे वैसा ही उनका जीवन आकार लेता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों में धार्मिक शिक्षा एवं नैतिक सुसंस्कार निर्माण वर्तमान में बहुत जरूरी है। साध्वी सुदीप्ति ने बच्चों की प्रतिक्रमण की कक्षा ली। संघ मंत्री महावीरचंद धारीवाल ने शिविर का निरीक्षण किया। संजय कुमार कचोलिया, रतनीबाई गन्ना, श्वेता धारीवाल, मंजू मेहता ने अध्यापन कराया। शिविरार्थियों को संघ की ओर से पुरस्कार दिए गए।


सादा जीवन-उच्च विचार हमारी संस्कृति की देन
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने प्रवचन में कहा कि सादा जीवन, उच्च विचार और उच्च आचार हमारी संस्कृति की देन हैं। उन्होंने कहा कि सौंदर्य प्रसाधनों से भी सौंदर्य बढ़ता है और आभूषणों से भी। सादा जीवन इन दोनों से ऊपर है। यदि हम अध्यात्म की गहराई में न भी उतर पाए तो सिर्फ सादगी को अपना लें। सादगी से बड़ा सौंदर्य दुनिया में और नहीं है। हिंसा बंधन है, अहिंसा आजादी है। मुक्ति का पैगाम है-इसलिए मेकअप का त्याग करें औार सादगी को जीवन में अपनाएं।