
महानरेगा के जरिये करेंगे सूखे की मार का सामना
बेंगलूरु. सूखे का दंश व फसल ऋण माफी योजना का लाभ अभी तक नहीं मिलने से दो-तरफा मार सह रहे लघु व सीमांत किसानों को राज्य सरकार महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महानरेगा) के तहत नगद लाभ दिलाने पर बल दे रही है। हालांकि, अभी तक कई किसानों को व्यक्तिगत तौर पर इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है जिसपर राज्य के ग्रामीण विकास व पंचायत राज मंत्री कृष्णा बैरेगौड़ा ने नाराजगी जताई है।
यहां बुधवार को जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि केले की फसल उगाकर किसान प्रति हेक्टेयर 80 हजार रुपए प्राप्त कर सकते हैं। इससे कमोबेश उनके पूरे निवेश की भरपाई हो जाती है। नरेगा के तहत ऐसी 20 से अधिक फसलें हैं जिनकी खेती कर किसान धन अर्जित कर सकते हैं।
सृजित होंगे 10 करोड़ मानव श्रम दिवस
उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे के हालात को ध्यान में रखते हुए नरेगा के तहत इस साल कुल 10 करोड़ मानव श्रम दिवस सृजित किए जाएंगे। इस साल 8.5 करोड़ लोगों को रोजगार देने की योजना बनाई गई थी लेकिन हालात को देखते हुए सरकार ने लघु किसानों व कृषि श्रमिकों के लिए रोजगार बढ़ाने का निर्णय किया है। सरकार के इस निर्णय से ग्रामीण इलाकों से पलायन रुकेगा और स्थाई संपतियों का निर्माण होगा। पेयजल की समस्या नहीं होने के उपाय किए गए हैं। इस साल कुल 2350 करोड़ रुपए की लागत से कुल 27 हजार विभिन्न निर्माण कार्य शुरू किए जाएंगे। जिन गांवों में दो दिनों में भी एक बार पानी नहीं मिल पा रहा है उन गांवों में टेंकरों से पेयजल की आपूर्ति करने के निर्देश दिए गए हैं। गांवों में पंचायतों के जरिए कचरा निपटान की योजना लागू की जाएगी। पहले चरण में 500 ग्राम पंचायतों में इस कार्यक्रम को लागू किया गया है। शहरों की तर्ज पर गांवों में भी हरा व सूखा कचरा अल-अलग एकत्रित किया जाएगा। हरे कचरे का इस्तेमाल किसान कंपोस्ट खाद बनाने में करेंगे जबकि सूखे कचरे का पंचायतों को निपटान करना होगा। ग्राम पंचायतों को स्वच्छता के लिए पृथक कर लगाने का अधिकार दिया गया है। उडुपी जिले की कुछ पंचायतों में हरेक घर से 80 रुपए मासिक कर वसूल किया जा रहा है।

Published on:
29 Nov 2018 11:32 pm
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