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डोनिमलाई अयस्क की प्रीमियम दर में कमी चाहता है एनडीएमसी

पट्टे के नवीनीकरण के बाद उत्पन्न हुई बाधा

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डोनिमलाई अयस्क की प्रीमियम दर में कमी चाहता है एनडीएमसी

बेंगलूरु. राज्य के स्वामित्व वाली राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनडीएमसी) के शीर्ष अधिकारी खनिज समृद्ध बल्लारी जिले में डोनिमलाई खानों से निकाले गए लौह अयस्क की लागत के 80 प्रतिशत की प्रीमियम दर को कम करने के लिए कर्नाटक सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। एनडीएमसी पिछले 50 से अधिक वर्षों से खनन गतिविधियां संचालित कर रहा है।
आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को संकेत दिया कि 2 नवंबर को कर्नाटक सरकार द्वारा विस्तारित 20 वर्षों के लिए पट्टे के नवीनीकरण के बाद बाधा उत्पन्न हुई है। एनएमडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कर्नाटक सरकार के कदम से प्रति टन 1,348 रुपए का नुकसान होगा और इसके परिणामस्वरूप प्रति वर्ष 944 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है क्योंकि सालाना लगभग सात मिलियन टन अयस्क निकाला जाता है। डोनिमलाई से खनन लोहे का निर्यात एनएमडीसी द्वारा जापान और चीन को किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार एनएमडीसी 8 0 प्रतिशत की प्रीमियम दर को कम करने के लिए कर्नाटक सरकार को मनाने के लिए सभी प्रयास कर रही है, जिसमें कहा गया है कि यह खान और खनिज अधिनियम 2015 तथा खनन (सरकारी कंपनियों द्वारा) नियम 2015 के प्रावधानों के तहत मौजूदा नियमों के खिलाफ है।
इस्पात मंत्रालय ने भी एनएमडीसी के खनन रुकने की बाधा समाप्त करने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों और एनएमडीसी की बैठक बुलाई थी। खनन परिचालन रोकने से उत्पन्न होने वाली कमी को भरने के लिए केंद्रीय मंत्रालय के खान मंत्रालय के अधिकारी वार्ता में शामिल थे और कार्य योजना तैयार की जा रही है जिससे खनन गतिविधियां बाधित न हो और देश में इस्पात उत्पादन पर प्रतिकूल असर न पड़े।