
नेमिनाथ जन्म कल्याणक उत्सव मनाया
बेंगलूरु. सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में नेमिनाथ जन्म कल्याणक उत्सव, आचार्य लब्धिसूरीश्वर गुणानुवाद सभा एवं दीक्षा कल्याणक प्रथम ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम आचार्य चन्द्रयश सूरीश्वर तथा प्रवर्तक कलापूर्ण विजय की निश्रा में हुआ। प्रारंभिक यात्रा में गिरी बधावना कर गिरनार टुंक पहुंचे।
वहां नेमिनाथ की प्रतिमा का अभिषेक हुआ। इसके बाद चम्पालाल सावलचंद बाफणा परिवार द्वारा दीक्षा कल्याणक जिनालय पर ध्वजा लहराई गई। आचार्य ने गुणानुवाद करते हुए कहा कि लब्धिसूरी योगी पुरुष थे। उन्नीस वर्ष की उम्र में चारित्र स्वीकार कर कमल सूरीश्वर के शिष्य बने।
बाल वय में ही उन्होंने मां को कहा था कि मुझे बनना है भगवान। दीक्षा लेकर जैनागम, तर्क, व्याकरण आदि के अभ्यास से महान विद्वान बने। इस अवसर पर कलापूर्ण विजय ने भी गुणानंवाद किए। संचालन अशिन भाई ने किया।
ललित अध्यक्ष, शशि बने मंत्री
बेंगलूरु. जिनकुशल सूरी जैन आराधना भवन बसवनगुड़ी में अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की साधारण सभा साध्वी प्रियरंजनाश्री की निश्रा में आयोजित हुई। कोषाध्यक्ष विकाश खटोड़ ने 3 वर्षों के आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत किया। स्वागत अध्यक्ष ललित डाकलिया ने किया। राष्टीय उपाध्यक्ष कुशल गुलेच्छा ने नई कार्यकारिणी की घोषणा की। ललित रांका अध्यक्ष एवं शशि चोपड़ा को मंत्री बनाया गया। संचालन कैलाश संखलेचा ने किया। धन्यवाद अरविंद कोठारी ने दिया।
सूक्ष्म बुद्धि धारण करें
बेंगलूरु. वीवीपुरम स्थित सीमंधर शांति सूरी जैन ट्रस्ट की ओर से आयोजित प्रवचन में आचार्य चन्द्रभूषण सूरीश्वर ने कहा कि अनंत दुखों का नाश करना है, अनंत सुखों की प्राप्ति करनी है तो धर्म रत्न की प्राप्ति जरूरी है। सच्चा धर्म रत्न तो संयम जीवन है। जो संयम प्राप्त करने में असमर्थ है, अशक्त है उनके लिए श्रावक जीवन है। उन्होंने कहा कि कर्म सत्ता असक्ति से रहे हुए व्यक्ति को माफ कर देगी लेकिन आसक्ति से रहे हुए व्यक्ति को कर्म-सत्ता माफ नहीं करेगी। जिसके पास सूक्ष्म बुद्धि होती है वही इस संसार से पार उतर सकता है। इसलिए सूक्ष्म बुद्धि धारण करें।
Published on:
18 Aug 2018 05:37 pm
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