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निपह वायरस: पृथक वार्ड के पक्ष में नहीं निम्हांस

निदेशक ने कहा, अन्य मरीजों को खतरा, जरूरत पडऩे पर भेजेंगे चिकित्सक, उपचार के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था
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निपह वायरस: पृथक वार्ड के पक्ष में नहीं निम्हांस

बेंगलूरु. प्रदेश में निपह वायरस के प्रसार को रोकने व इसके फैलाव की स्थिति में मरीजों के उपचार के लिए जहां स्वास्थ्य विभाग ने शहर के तीन सरकारी अस्पतालों में पृथक वार्ड की व्यवस्था की है, वहीं इसके विपरीत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं स्नायु विज्ञान संस्थान (निम्हांस) ने ऐसे वार्ड स्थापित करने में असमर्थता जताई है। हालांकि निम्हांस के निदेशक डॉ. बी.एन. गंगाधर ने बताया कि निम्हांस निपह वायरस के संदिग्ध मरीजों के उपचार से मना नहीं कर रहा है। ऐसे मरीजों के लिए पृथक वार्ड तो नहीं पर अलग से एक कमरा आरक्षित रखा गया है। निपह की पुष्टि होने पर मरीज को उन अस्पतालों में भेजा जाएगा, जहां वार्ड की व्यवस्था है।

डॉ. गंगाधर ने बताया कि निम्हांस निपह वायरस संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए प्रशिक्षित नहीं है। निम्हांस में मरीजों की संख्या ज्यादा है। एक भी बिस्तर खाली नहीं है। ऐसे में अगर निपह वायरस संक्रमित मरीज आएंगे तो अन्य मरीजों को खतरा हो सकता है। निम्हांस में ऐसे मरीजों को रखना ठीक नहीं होगा। जब और जहां जरूरत पड़ेगी, निम्हांस अपने विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्टों को भेजने के लिए तैयार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपह को उन आठ बड़ी बीमारियों में शामिल किया है, जिससे वैश्विक महामारी का खतरा है। इनमें इबोला और जीका वायरस भी शामिल हैं। निपह से बचाव के लिए कोई टीका नहीं है। इंटेंसिव सपोर्टिव केयर (गहन सहायक देखभाल) ही इसका उपचार है। ऐसे में इन मरीजों को उन्हीं अस्पतालों में भर्ती करने की जरूरत है जहां पृथक वार्ड हों।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट डिसीज (आरजीआईसीडी), केसी जनरल व विक्टोरिया अस्पताल में पृथक वार्ड की व्यवस्था की है। लेकिन आरजीआईसीडी में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं हैं। जबकि निपह वायरस न्यूरोट्रोपिक (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और मस्तिष्क में प्राणघातक सूजन उत्पन्न करता है।) बीमारी है। उपचार में न्यूरोलॉजिस्टों की भूमिका अहम होती है। प्रदेश में निम्हांस एक मात्र सरकारी अस्पताल है, जहां न्यूरोवायरोलॉजी विभाग है। ऐसे में निम्हांस में निपह वायरस के मरीजों के पूर्ण उपचार की व्यवस्था होती तो बेहतर होता।

चालकों, परिचालकों का केरल जाने से इनकार
केरल में निपह वायरस के प्रकोप के कारण कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) के चालक, परिचालकों ने पड़ोसी राज्य की ओर से जाने से इंकार कर दिया है। इस फैसले से दोनों राज्यों के बीच पचास फीसदी बसों की सेवा स्थगित होगई है। हर दिन केरल-कर्नाटक के बीच 168 शेड्यूल पर बसें चलती हैं। इन बसों के चालक, परिचालक लंबी छुट्टी लेकर घर चले गए हैं। केवल बीस फीसदी चालक ही बसों को चलाने आगे आए हैं। हालांकि किसी भी चालक, परिचालक में निपह वायरस के लक्षण नहीं दिखे हैं। फिर भी उनके बीच भय व्याप्त है।
केएसआरटीसी के महा प्रबंधक (यातायात) एन. विश्वनाथ ने कहा कि दोनों राज्यों के बीच यात्रियों की संख्या भी कम होगई है। एक बास में तीन से चार यात्री ही दिखाई देते हैं।

गत चार दिनों से केरल के लिए टिकट आरक्षण का कार्य लगभग ठप है। केरल को मेंगलूरु, मैसूरु और बेंगलूरु से बसं परिचालित होती हैं। बेंगलूरु से हर दिन 28 प्रीमियम बसें चलती हैं। बेंगलूरु से कालीकट के लिए केवल दो बसें जाती हैं। कोई भी बस केरल में दो घंटा से अधिक नहीं रुकती। लंबे मार्ग वाले बसों में दो चालक होते हैं। एक चालक बस चलाता है तो दूसरा चालक सोता है। चामराजनगर, पुत्तूर और अन्य शहरंों से भी बसें चलती हैं। एहतियाती तौर पर सभी चालकों और परिचालकों के स्वास्थ्य की जांच की गई है। केएसआरटीसी के जरिए केरल जाने वाली सभी सभी बसों में निपह से संबंधी जरूरी जानकारियां दी जा रही हैं।

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