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न चली झाड़ू, ना निशाने पर लगा तीर

जदयू ने 27 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था लेकिन नीतीश कुमार के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फिर गया

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बेंगलूरु. अपने सांगठनिक विस्तार के मकसद से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में उतरी कई राजनीतिक पार्टियों को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (आप), बिहार में सत्तारुढ़ जनता दल यूनाइटेड सहित हैदराबाद आधारित ऑल इंडिया वूमन इंपावरमेंट पार्टी को कर्नाटक के मतदाओं ने पूरी तरह नकार दिया। न तो आप की झाड़ू चली न जद यू का तीर कर्नाटक में सही निशाने पर लगा।

जदयू ने 27 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था लेकिन नीतीश कुमार के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फिर गया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महिमा पटेल को चन्नगिरि विधानसभा क्षेत्र में करारी हार का सामना करना पड़ा। पटेल को मात्र 3954 वोट मिले और वे अपने विधानसभा क्षेत्र में चौथे नंबर पर रहे। पटेल के लिए खुद नीतीश कुमार ने चुनाव प्रचार किया था। पार्टी के मात्र चार उम्मीदवारों को चार अंकों में मत प्राप्त हुए जबकि सर्वाधिक 16640 वोट मायाकोंडा से पार्टी उम्मीदवार एम. बसवराज नाइक को मिला। पार्टी के शेष सभी उम्मीदवारों को सैंकड़ा में ही मत प्राप्त हुआ जबकि हेब्बाल में जदयू उम्मीदवार ए. असगर को मात्र 34 वोट मिले। ज्यादातर सीटों पर पार्टी को 500 से कम वोट मिले।

आप ने भी 28 उम्मीदवार उतारे थे लेकिन आप की उम्मीदों पर कर्नाटक की जनता ने झाड़ू चला दी और अधिकांश सीटों पर आप उम्मीदवारों को जितने मत प्राप्त हुए उससे ज्यादा वोट नोटा के पक्ष में गए। आप के सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। आप के पृथ्वी रेड्डी को सर्वज्ञनगर में मात्र 1861 मत मिले जबकि नोटा के पक्ष में 2405 बटन दबे। शिवाजी नगर में आप उम्मीदवार अयूब खान को मात्र 300 वोट मिले तो पुलकेशीनगर में आप के सिद्धगंगय्या आर. को मात्र 301 वोटों से संतोष करना पड़ा। बेंगलूरु के बाहर भी आप उम्मीदवारों को जनता ने पूरी तरह नकार दिया और कहीं भी पार्टी पांच अंकों में मत लाने में असफल रही।

शेख और योगेंद्र यादव को करारा झटका
ऑल इंडिया वुमन एम्पावरमेंट पार्टी की प्रमुख नौहेरा शेख ने सभी 224 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे लेकिन पार्टी को न तो किसी सीट पर सफलता मिली और ना ही पार्टी का प्रदर्शन किसी भी सीट पर प्रभावशाली रहा। पार्टी को पूरे राज्य में सिर्फ 97,679 मत मिले। इसी तरह राजनीतिक विश्लेषक से राजनीतिक पार्टी बनाकर कर्नाटक चुनाव में उतरे योगेन्द्र यादव की पार्टी स्वराज को पूरे राज्य में कहीं भी सफलता नहीं मिला। यहां तक कि मेलुकोटे में पार्टी उम्मीदवार दर्शन पुट्टणय्या को भी हार का सामना करना पड़ा जबकि उनके पिता निर्दलीय ही इस सीट पर चुनाव जीतते आए थे।

3.22 लाख को भाया नोटा
बेंगलूरु. विधानसभा चुनाव में इस बार एक फीसदी से भी कम मतदाताओं ने इनमें से नोटा (कोई नहीं) का प्रयोग किया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 0.9 फीसदी यानी 3 लाख 22 हजार 841 मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया।

बेंगलूरु में 48 हजार से ज्यादा
भले ही बेंगलूरुवासियों के मतदान का आंकड़ा 50 प्रतिशत रहा लेकिन मतदाताओं ने नोटा (कोई नहीं) बटन दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शहर के 26 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 48,311 मत नोटा के पक्ष में गए। महादेवपुर में सर्वाधिक 3482 मतदाताओं ने नोटा बदन दबाया। वहीं बोम्मनहल्ली में 2491 मत नोटा के पक्ष में गए जबकि सर्वज्ञनगर में 2405 और पद्मनाभनगर में 2404 मतदाताओं ने नोटा बटन दबाया। इसके अतिरिक्त बीटीएम लेआउट में 235, बेंगलूरु दक्षिण में 1813, बैटरायनपुर में 2154, सीवी रमण नगर में 2259, चामराजपेट में 726, चिकपेट में 1340, दासरहल्ली में 2011, गांधीनगर में 2074, गोविंदराज नगर में 1589, हेब्बाल में 1450, केआरपुरम में 1976, महालक्ष्मी लेआउट में 1739, मल्लेश्वरम में 2157, पुलकेशीनगर में 1402, राजाजी नगर में 1931, शांति नगर में 1386, शिवाजी नगर में 1654, विजय नगर में 1967, यलहंका में 2051, यशवंतपुर में 1453 और अनेकल में 2115 वोट नोटा के पक्ष में गए।