
हीरेन जोशी
कुम्टा (उत्तर कन्नड़) .विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा नजर जिन क्षेत्रों पर हैं उनमें से एक है, उत्तर कन्नड़ जिला। साम्प्रदायिक रूप से बेहद संवेदनशील इस क्षेत्र में इस बार पांच बार से स्थानीय सांसद अनंत कुमार हेगड़े के विवादित बयान भी केंद्र में हैं। पिछले दिनों संविधान में बदलाव संबंधी हेगड़े के बयानों से पूरी भाजपा को बैक फुट पर आना पड़ा था। स्थानीय एससी, एसटी इन बयानों को लेकर तब से ही नाराज है। ऐसे में अगर गुस्सा वोटों में बदल गया तो सभी छह सीटों पर नुकसान हो सकता है।
एससी, एसटी की यहां संख्या 25 प्रतिशत तक है। उत्तर कन्नड़ में कांग्रेस के लिए सुकून की बात ये है कि मौजूदा छह में से पांच सीटें उनके पास हैं। साथ ही तीन सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में इस बार कोस्टल बेल्ट में जहां दक्षिण कन्नड़ और उडुपी से भाजपा भारी जीत की उम्मीद में है वहीं उत्तर कन्नड़ पार्टी के लिए मनमाफिक नतीजे लेने में जोर आ रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी के नतीजे अच्छे नहीं रहे तो यहां हेगड़े पर सवाल उठेंगे और अच्छे परिणाम मिले तो श्रेय भी हेगड़े को ही मिलेगा।
खास समर्थक भी निराश राज्य की सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही भाजपा में स्थानीय कट्टर समर्थकों में से कई हेगड़े से नाराज हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कुम्टा सीट से पार्टी के खिलाफ निर्दलीय लड़ रहे नामी कार्यकर्ता सूरज नायक सोनी हैं। दिसम्बर में हुए दंगे के बाद अभी एक माह पूर्व ही उन्हें गिरफ्तार किया गया था। साथ में 50 अन्य भी गिरफ्तार हुए थे। टिकट देने की बारी आई तो क्षेत्र से जद ध से हाल ही में भाजपा में शामिल हुए दिनकर शेट्टी को थमा दिया गया। इसका असर पड़ोस की सिरसी सीट पर भी भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। सिरसी से विश्वेश्वर हेगड़े जिले में पार्टी के सबसे मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं। हलियाल सीट पर कांग्रेस के दिग्गज आर वी देशपांडे मजबूत हैं। भाजपा का आरोप है कि वे पैसे के बल पर चुनाव लड़ रहे हैं।
येल्लापुर में भाजपा के वीएस पाटिल लिंगायत हैं तो कांग्रेस के हेब्बार भी ब्राह्मण हैं। यहां मुकाबला कड़ा है। अंकोला में भाजपा प्रत्याशी रूपाली नायक कोंकण मराठा क्षेत्र से हैं। अंकोला और भटकल में भी मुकाबला बराबरी का है। क्षेत्र में मतदाताओं के बीच जाने पर एक बात स्पष्ट हो रही है कि भाजपा के केंद्र में मंत्री अनंत कुमार हेगड़े के यहां समर्थक और विरोधी दोनों बड़ी संख्या में हैं। जबकि कांग्रेस इनके विवादित बयानों के कारण सत्ता विरोधी लहर से बचती नजर आ रही है। पूरा चुनाव बयानों के इर्द-गिर्द चल रहा है। स्थानीय विकास के मुद्दे यहां गौण हैं।
Published on:
10 May 2018 06:49 pm
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