
लागत ही नहीं जमीन अधिग्रहण भी बनेगी बाधा : एलिवेटेड कोरिडोर की राह में रोड़े
बेंगलूरु. बड़े वादे के साथ सत्ता में आई कांग्रेस और जद-एस गठबंधन सरकार के मुखिया एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलूरु शहर को यातायात जाम से निजात दिलानेे के लिए एलिवेटेड कोरिडोर परियोजना पर फिर से बल दिया है। अपने पहले ही बजट में 15 हजार 825 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली परियोजना की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा। लेकिन, अन्य परियोजनाओं की तरह इसमें भी जमीन अधिग्रहण बड़ी बाधा बनकर सामने आई है।
हालांकि, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा वर्ष 2015 के अपने बजट में की थी लेकिन तब से अब तक यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अब नई सरकार ने शहर की चारों दिशाओं को 95 किमी लंबे छह कोरिडोर एक-दूसरे से जुड़े (इंटरकनेक्टेड) एलिवेटेड कोरिडोर से जोडऩे की परियोजना को फिर से हवा दी है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि तमाम उपलब्धियों के बावजूद बेंगलूरु की परिवहन व्यवस्था का विकास उचित ढंग से नहीं हो पाया। इसलिए अगले चार साल में छह इंटरकनेक्टेड एलिवेटेड कोरिडोर तैयार किए जाएंगे जिससे शहर की यातायात व्यवस्था काफी सुधर जाएगी। इस परियोजना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि नम्मा मेट्रो के साथ इसका संयोजन ठीक से बैठे और उसका पूरक बने। इसके लिए मुख्यमंत्री ने 1 हजार करोड़ रुपए का आवंटन भी बजट में किया। यह परियोजना पांच चरणों में पूरी की जाएगी। लेकिन, शुरू होने से पहले ही परियोजना की राह में जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी बाधा बनकर आ गई है।
दरअसल, इस परियोजना के लिए 152 एकड़ जमीन की आवश्यकता है और सरकार ने परियोजना के लिए जो लागत अनुमान व्यक्त किया है उसमें जमीन अधिग्रहण की लागत को नहीं जोड़ा गया है। अगर जमीन अधिग्रहण लागत इसमें जोड़ दी जाए तो परियोजना पर लगभग 33 हजार 600 करोड़ खर्च आने का अनुमान है। यानी, कुमारस्वामी सरकार ने सिर्फ निर्माण खर्च की बात की है जबकि जमीन अधिग्रहण निर्माण खर्च से कहीं अधिक महंगा है।
हाईब्रिड मॉडल अपनाने की योजना
हालांकि, राज्य सरकार ने एलिवेटेड कोरिडोर परियोजना को हाईब्रिड मॉडल के आधार पर पूरा करने की योजना बनाई है जिसमें निजी क्षेत्र निर्माण लागत में 60 फीसदी योगदान करेगा। शेष 40 फीसदी लागत सरकार देगी। लेकिन, जमीन अधिग्रहण की पूरी लागत भी अलग से सरकार को ही वहन करना है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारियों के मुताबिक हाई-वे निर्माण में भी जमीन अधिग्रहण पर आने वाली लागत पूरी तरह केंद्र सरकार उठाती है।
बेंगलूरु मेट्रो रेल निगम से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी जमीन अधिग्रहण का पूरा खर्च राज्य सरकार ही उठाती है जबकि निर्माण लागत विभिन्न स्रोतों से जुटाई जाती है जिमसें उधार भी शामिल है। एलिवेटेड कोरिडोर परियोजना के लिए कर्नाटक सड़क विकास परिवहन लिमिटेड (केआरडीसीएल) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। केआरडीसीएल के अधिकारियों ने माना कि इस परियोजना को पूरा करने में जमीन अधिग्रहण एक बड़ी समस्या है।
...सिर्फ 15 मिनट में तय होगी दूरी
दरअसल, इस परियोजना में निर्माण लागत अनुमानत: प्रति किलोमीटर लगभग 166 करोड़ रुपए है जो कि एक एलिवेटेड मेट्रो परियोजना के बराबर है। परियोजना के तहत प्रस्तावित एलिवेटेड कोरिडोर में हेब्बाल-सिल्क बोर्ड के बीच उत्तर दक्षिण कोरिडोर बनेगा जो 23.03 किमी का होगा। पूर्व-पश्चिम कोरिडोर हिस्से में बनेगा।
इसका पहला केआरपुरम-गोरगुंटेपाल्या (36.70 किमी) और दूसरा हिस्सा मिनर्वा सर्कल से नाइस रोड जंक्शन (6.60 किमी) के बीच होगा। इसी में वर्तुर कोडी-रिचमंड सर्किल (17.20 किमी) का हिस्सा भी जुड़ेेगा। इसके अलावा 11.37 किमी का लूप भी बनेगा। कई एशियाई शहरों में एलिवेटेड कोरिडोर परियोजना बनी है जिसमें बीजिंग, बैंकॉक, टोक्यो, हांगकांग आदि शामिल हैं। दावा है कि एलिवेटेड कोरिडोर तैयार होने के बाद केआर पुरम से यशवंतपुर या हेब्बाल से सिल्क बोर्ड की यात्रा महज 15 मिनट में तय होगी जो अभी कम से कम 2 घंटे में पूरी होती है।
Published on:
26 Jul 2018 05:20 pm
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