
आत्मा के बिना नश्वर देह की कीमत नहीं
मैसूरु. महावीर भवन में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने धर्मसभा में कहा कि देह और आत्मा भिन्न भिन्न है। आत्मा के अस्तित्व के बिना इस नश्वर देह की कोई कीमत नहीं है। जिंदा इंसान तो हर जगह सम्मान पाता है परंतु मरने के बाद श्मशान में उसकी देह को जला दिया जाता है। परिवार में चाहे कितना भी प्रेम क्यों न हो मरे हुए व्यक्ति को एक दिन भी घर में रखने को तैयार नहीं है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के समाचार मिलते हैं, हम सबसे पहला प्रश्न करते हैं कि पार्थिव देह को कितने बजे निकाला जाएगा।
पिता तो हमेशा पुत्र के जीवन को सुधारने का ही काम करता है
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में सिटी स्थानक में डॉ समकित मुनि ने गुरुवार को उत्तराध्ययन सूत्र का वांचन एवं विश्लेषण कार्यक्रम में कहा कि पुत्र बाप का जीवन सुधार भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है। लेकिन पिता तो हमेशा पुत्र के जीवन को सुधारने का ही काम करता है। गुरु का शिष्य भी पुत्र की तरह गुरु की जिंदगी सुधार भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है।
उत्तराध्ययन की तेरहवीं गाथा का विश्लेषण करते हुए मुनि ने बताया कि जो बेटा या शिष्य कुलक्षण वाले होते हैं, वो अपने पिता और गुरु की बात नहीं मानते है। पिता और गुरु को कठोर शब्द से प्रहार करते है तथा कुशील और दुराचारी होते हैं। जो सुलक्षण वाले होते हैं। जो सुलक्षण वाले होते हैं, वे अपने पिता और गुरु की इच्छानुसार और आज्ञानुसार चलते हैं, वे उनकी आज्ञा का शीघ्र पालन में जुड़ जाते हैं।
मुनि ने बताया कि एक अविनीत शिष्य के कारण कठोर तपस्वी गुरु और आचार्य चंडकौशिक जैसे महा भयंकर सर्प बन जाते हैं और वहीं पंथक मुनि जैसे विनीत शिष्य के कारण शिथिल बने हुए शैलक राजर्षि को भी मोक्ष तक पहुंचा देते हैं। 14 अक्टूबर को युवाचार्य महेंद्र ऋषि की जयंती व 16 अक्टूबर को मुनि समकितप्रकाश की जयंती मनाई जाएगी।
Published on:
12 Oct 2018 05:05 pm
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