बकाया संपत्ति कर वसूल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान वाणिज्यिक भवनों पर करोड़ों का कर बकाया
बेंगलूरु. महानगर पलिका ने संपत्ति कर संग्रहण को लेकर विशेष रणनीति बनाई है। जिसके तहत पहले तो कर वसूली के लिए अभियान चलाया जाएगा, उसके बाद संपत्ति मालिकों को नोटिस दिए जाएंगे, डफली बजाकर कर ना चुकाने वालों का प्रचार किया जाए। फिर भी कर भुगतान नहीं होता तो नोटिस जारी किए जाएंगे, इतने के बावजूद भी कोई लगातार अनदेखी करता है तो उसकी संपत्तियां नीलाम की जाएंगी।
बृहद बेंगलूर महानगर पालिका (बीबीएमपी) ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में 3100 करोड़ रुपए संपत्ति कर संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया है। सितम्बर माह के अंत तक 1,920.97 करोड़ रुपए अर्थात 61.45 फीसदी संपत्ति कर संग्रहण किया गया है। हालांकि शहर के कई वाणिज्यिक भवनों के मालिकों ने अब तक कर का भुगतान नहीं किया है। इस बकाया संपत्ति कर के वसूले के लिए बीबीएमपी सभी 8 संभागों में विशेष कर वसूली अभियान चलाएगी। बीबीएमपी के आयुक्त मंजुनाथ प्रसाद के अनुसार सभी संभागों के संयुक्त आयुक्त को कर संग्रहण का लक्ष्य पूरा करने का दायित्व सौंपा गया है। पालिका की व्याप्ति में 19 लाख 50 हजार अचल संपत्तियां हैं।
इनमें से 14 लाख 17 हजार 402 संपत्तियों के मालिकों ने कर भुगतान किया है। इनमें से 5 लाख 29 हजार 830 मालिकों ने ऑनलाइन कर भुगतान सुविधा का उपयोग करते हुए भुगतान किया है। अभी भी शहर की 5 लाख 29 हजार 830 अचल संपत्तियों का कर भुगतान नहीं हुआ। ऐसी संपत्तियों को चिह्नित करने के लिए डिजिटल नक्शा तैयार किया जा रहा है। बकाया संपत्ति कर का भुगतान तथा सभी अचल संपत्तियों को दायरे में लाने से संपत्ति कर संग्रहण में देढ़ गुणा वृद्धि संभव है। संपत्तियों को विशेष पहचान संख्या (पीआइडी) से चिह्नांकित किया जा रहा है।
स्वघोषित संपत्ति कर योजना का दुरुपयोग
वर्ष 2008 में बीबीएमपी ने अचल संपत्तियों के मालिकों को अपनी अचल संपत्ति का विवरण देकर कर भुगतान की सुविधा (एसएएस) दी थी। लेकिन इसका गलत इस्तेमाल हुआ और लोगों ने वास्तविकता से कम संपत्तियां घोषित करते हुए कर भुगतान में अनुचित लाभ उठाया। जिसके बाद निजी कंपनी से संपत्तियों का सर्वेक्षण किया गया। जिससे गलत विवरण दिए जाने का खुलासा हुआ। संपत्ति कर का भुगतान नहीं करने वाले 45 मॉल, टेक्नो पार्क, वाणिज्यिक भवन के मालिकों को 223 करोड़ रुपए जमा करने के नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से 21 भवनों के मालिकों ने महानगर पालिका की इस नोटिस के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की है।