जमीन के मालिक की ओर से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) धारक मंजूनाथ ने भूमि के बदले वैकल्पिक स्थान के लिए अर्जी दायर की थी। लेकिन, काफी समय तक उसका मामला लंबित रहा। मंजूनाथ ने नवबंर में 2021 में अर्जी दाखिल की थी। उसकी अर्जी सहायक भू- अधिग्रहण अधिकारी और सर्वेयर के पास से अग्रसारित होकर 3 जनवरी 2022 को राजू के पास पहुंची थी। आरोप है कि राजू ने उस फाइल को छह महीने से अधिक समय तक लंबित रखा। 7 जून 2022 को उसकी गिरफ्तारी तक फाइल उसके पास ही थी। एसीबी ने राजू को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोपी राजू ने मंजूनाथ से कथित तौर पर एक करोड़ रुपए की रिश्वत की मांग की थी। हालांकि, 60 लाख रुपए पर सहमति बनी थी।