
कचरे से बिजली बनाने की योजना खटाई में
बेंगलूरु. कर्नाटक विद्युत निगम लिमिटेड (केपीसीएल) ने कचरे से बिजली बनाने का फैसला किया है। केपीसीएल ने दो साल पहले ही बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) से कचरा लेकर बिजली उत्पादन का करार किया था, लेकिन इस पर दिशा में कोई काम नहीं हुआ।
पालिका के आयुक्त एन. मंजुनाथ प्रसाद ने पत्रकारों को बताया कि अब पालिका के सामने कचरा निस्तारण की समस्या बढऩे पर उप मुख्यमंत्री ने पालिका को इस करार पर काम करने का आदेश दिया। पालिका ने केपीसीएल को संग्रहित कचरे का विवरण, डंपिंग यार्ड और अन्य विवरण पर आधारित रिपोर्ट दी है। मुख्यमंत्री एच.डी.कुमारस्वामी ने भी हाल ही में हुई ऊर्जा विभाग के प्रगित बैठक में कचरे से बिजली का उत्पादन करने की इकाई स्थापित करने की मंजूरी दी थी।
केपीसीएल बिड़दी में पांच एकड़ में कचरे से बिजली का उत्पादन करेगा। हर दिन 15 मैगावॉट बिजली का उत्पादन होने की संभावना है। पालिका के क्षेत्र से हर दिन चार हजार टन कचरा संग्रहित होता है।
पालिका हर साल कचरा निस्तारण के लिए 500 करोड़ रुपए खर्च करता है। बिड़दी-हेरोहल्ली रोड पर केपीसीएल की 175 एकड़ जमीन है। 15 एकड़ में इकाई स्थापित होगी। बिजली का उत्पादन करने के लिए हर दिन 500 से एक हजरा टन कचरे की जरूरत है। कचरे से बिजली उत्पादन में पालिका पर आर्थिक बोझ कम होगा।
उन्होंने कहा कि कचरे से बिजली का उत्पादन करने के लिए पांच निजी कंपनियां आगे आई थी। कंपनियों के मालिकों ने पालिका के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। कई गांवों के लोगों ने इसका विरोध किया। फिर कंपनियों से कोई जवाब नहीं लिया।
फिलहाल इजराइल, अमरीका और फ्रांस की कुछ कंपनियों ने कचरे से बिजली उत्पादन की इच्छा व्यक्त की है। इजराइल की सेतारेम कंपनी कन्नाहल्ली और सीगेहल्ली में, अमेरिका की इंंडियम कंपनी दोड्ेडा बिदराकल्लू और फ्रांस की टूवेज कंपनी चिकनागमंगला में इकाई स्थापित करेगी। इन कंपनियों को बिजली उत्पादन करने के लिए सरकार से अनुमति नहीं मिली है। सोमवार को अनुमति मिलने की संभावना है।
Published on:
29 Oct 2018 09:20 pm
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