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बगावत के सुर से बढ़ी ‘सियासी तपिश’

एचके पाटिल से भी मिले परमेश्वरआलाकमान ने सिद्धू को भी दी असंतुष्टों को मनाने की जिम्मेदारी
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 9 Jun 2018, 5:04 PM IST

congress

बगावत के सुर से बढ़ी 'सियासी तपिश'

बेंगलूरु. एच. डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में मंत्री पद पाने से वंचित रहे नेताओं की नाराजगी से उपजी 'सियासी तपिशÓ ने कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा दी है। कुछ असंतुष्ट नेताओं के 'बागीÓ होते सुर को देखते हुए कांग्रेस ने अब नाराज नेताओं को मनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस आलाकमान ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मामले में दखल का निर्णय किया है और दिल्ली से कुछ प्रमुख असंतुष्ट नेताओं के पास फोन आने की चर्चा भी है। बताया जाता है कि कांग्रेस आलाकमान ने नाराज चल रहे पूर्व मंत्री एम बी पाटिल को चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया है।

सूत्रों के अनुसार बढ़ते असंतोष पर काबू पाने की रणनीति पर चर्चा के लिए पार्टी आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर और प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव राव को दिल्ली तलब किया है। दोनों नेताओंं के देर शाम दिल्ली जाने की चर्चा है।
कांग्रेस अपने नाराज नेताओं को मनाने के लिए गठबंधन सरकार की अगुवाई कर रहे जद-एस नेताओं का भी सहारा ले रही है। उधर, विपक्षी भाजपा भी कांग्रेस में चल रहे घमासान का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा कुछ अंसतुष्ट कांग्रेस नेताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। एक पूर्व मंत्री ने शुक्रवार को स्वीकारा भी कि वे भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं और अच्छा असवर मिलने पर कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन भी थाम सकते हैं।

पाटिल को मनाने की मशक्कत
अलग लिंगायत धर्म के मसले पर काफी आक्रामक रहे पूर्व मंत्री एम. बी. पाटिल के 'बागीÓ तेवर के कारण कांग्रेस आलाकमान उन्हें मनाने की कोशिश कर रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को पाटिल से मिलने उनके आवास पर पहुंचे लेकिन पाटिल अपने रुख पर कायम रहे। इसके बाद कांग्रेस की पहल पर पाटिल को मनाने के लिए खुद मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी भी उनके बेंगलूरु के सदाशिवनगर स्थित आवास पर पहुंचे। इससे पहले परमेश्वर के अलावा मंत्री आर. वी. देशपांडे, डी. के. शिवकुमार, के. जे. जार्ज भी पाटिल के घर पहुंचे और उन्हें मनाने की कोशिश की। पाटिल के समर्थकों ने परमेश्वर का घेराव भी किया।

उपमुख्यमंत्री पद की मांग पर अड़े पाटिल
सूत्रों का कहना है कि पहले दौर में मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज पाटिल अब उपमुख्यमंत्री पद से कम पर मानने को राजी नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ नेता उन्हें मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में मंत्री बनाने का भरोसा दे रहे हैं लेकिन अब पाटिल अपनी उपेक्षा के बदले बड़ा ओहदा देने की मांग कर रहे हैं। पाटिल का कहना है कि उत्तर और दक्षिण कर्नाटक से अलग-अलग उपमुख्यमंत्री होना चाहिए ताकि किसी क्षेत्र की उपेक्षा न हो। बताया जाता है कि पार्टी ने पाटिल को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की पेशकश की लेकिन वे राजी नहीं हुए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी दोपहर बाद जब लिंगायत आंदोलन से जुड़े रहे एस ए जामदार से मिलने गए थे उसी वक्त दिल्ली से उनके पास किसी बड़े नेता का फोन आया और उसके तुरंत बाद पाटिल वहां से निकल गए। जामदार और पाटिल की मुलाकात सिर्फ पांच मिनट की रही।