
धार्मिक अनुष्ठान की तैयारियां
बेंगलूरु. आदिनाथ सेवा मंडल, लब्धि सूरी संगीत मंडल, संभवनाथ सेवा मंडल की बुधवार को संभवनाथ भवन में आयोजित बैठक में आदिनाथ संघ के ट्रस्ट मंडल के साथ आदिनाथ संघ व संभवनाथ जैन संघ में चल रहे 350 सिद्धितप के तपस्वियों के पारण व वरघोड़ा, बहुमान की रूपरेखा को लेकर चर्चा की गई। बैठक में कमेटियां गठित कर सदस्यों को जिम्मेदारियां सौंपी गई। बैठक में सभी मंडल के सदस्यों ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
वार्षिकोत्सव कल
बेंगलूरु. अलसूर स्थित अंगलिंगेश्वर मंदिर प्रांगण में स्थित संतोषी माता मंदिर का 27वां वार्षिकोत्सव शुक्रवार को मनाया जाएगा। इसी दिन माता का जन्मोत्सव व रक्षा बंधन का आयोजन भी होगा। प्रात: अभिषेक के बाद ध्वजारोहण से कार्यक्रम शुरू होंगे। सायं 7 बजे भक्ति संध्या होगी।
बंधन किसी भी प्राणी को प्रिय नहीं
विजयनगर स्थानक में साध्वी मणिप्रभा ने कहा कि बंधन किसी भी प्राणी को प्रिय नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी पशु-पक्षी को पिंजरे में डाला जाए, उसे सब सुख सुविधाएं दी जाएं और उससे पूछा जाए कि तुम सुखी हो तब वह यही कहेगा कि वह बंधन में है। उसे स्वतंत्र आकाश में उडऩा अच्छा लगता है। इसी प्रकार जो बंधन है वह किसी भी प्राणी को प्रिय नहीं है।
इसलिए हमें भगवान ने जो नौ तत्त्व बताए हैं उसमें जो बंधन है वह छोडऩे योग्य है। जो किसी को प्रिय नहीं वह त्यागने के लिए, छोडऩे के लिए है। साध्वी आस्था ने कहा कि मन स्वतंत्र है। मन को किसी की आवश्यकता नहीं रहती। शुभ प्रवृत्ति करने के लिए जो प्रथम पांच पुण्य है वह पूरक पुण्य है। उन पांच पुण्य को बांधने के लिए पदार्थ की भी आवश्यकता रहती है।
पदार्थ के साथ-साथ उस पुण्य को बांधने के लिए मन की भी आवश्यकता रहती है। बिना मन के यदि किसी को कोई वस्तु दे दी जाए तो क्या पुण्य लगेगा, नहीं, क्योंकि बिना मन के इन पांच पुण्यों को प्राप्त ही नहीं किया जा सकता। इसलिए असंज्ञी जीवों की अपेक्षा पाप संज्ञी जीवों को अधिक लगता है।
Published on:
30 Aug 2018, 5:11 PM IST
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