
बेंगलूरु. बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान के सुरक्षित क्षेत्र में खनन के आरोपों और पर्यावरणविदों द्वारा लगातार किए जा रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार इस संरक्षित क्षेत्र को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) के रूप में अधिूसचित कराने के लिए केन्द्र सरकार के पास एक परिवर्तित मौसदा भेजेगी। पिछले कुछ सप्ताह से पर्यावरणविद इस क्षेत्र को ईएसजेड के रूप में अंतिम रूप से अधिसूचित करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने उद्यान के सुरक्षित क्षेत्र में खनन और उत्खनन गतिविधियों की उपग्रहीय तस्वीरें भी उपलब्ध कराई हैं।
पिछले वर्ष राज्य सरकार ने पहला संशोधित मसौदा केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा था लेकिन केन्द्र सरकार ने इसे अब तक बफर जोन के रूप में मान्यता नहीं दी है और अब पहले मसौदे की अवधि समाप्त हो गई है। वहीं, वन विभाग का कहना है कि राज्य सरकार का वष १९९१ का सुरक्षित क्षेत्र आदेश अब भी मान्य है और ईएसजेड अधिसूचना से ज्यादा बढिया है। यह एक सरल और सख्त आदेश वाला प्रावधान है जो उद्यान के एक किलोमीटर के दायरे को सुरक्षित क्षेत्र के रूप में मान्यता देता है।
सुरक्षित क्षेत्र में कोई खनन नहीं
प्रधान मुख्य संरक्षक और मुख्य वन्यजीवन वार्डन सी. जयराम ने कहा कि चंूकि पिछला मसौदा अब समाप्त हो गया है कि इसलिए हम दूसरी बार परिवर्तित मौसदा केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेज रहे हैं। यह ड्राफ्ट भी पहले जैसा ही होगा जहां राज्य सरकार ने ईएसजी क्षेत्र को 268.96 वर्ग किलोमीटर से 181.57 वर्ग किमी के दायरे में घटा दिया था।
उन्होंने पर्यावरणविदों के सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि मौजूदा समय में राष्ट्रीय उद्यान के सुरक्षित क्षेत्र के बाहरी हिस्से में तीन जगहों पर खनन गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि मैंने तीनों क्षेत्रों का दौरा कर निरीक्षण किया जिसमें सुरक्षित क्षेत्र के एक किलोमीटर के दायरे में खनन कार्य नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि तीनों खनन कंपनियों को १५ से २० वर्ष के लिए लाइसेंस है। हालांकि, उन्होंने कहा कि एक खनन क्षेत्र के साथ कुछ तकनीकी समस्याएं हैं।
उन्होंने कहा कि वन विभाग इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों के संचालन को लेकर हमेशा भी संघर्ष करता रहा है। हालांकि वर्ष-१९९१ का सुरक्षित क्षेत्र आदेश को यहां सख्ती से कार्यान्वित किया गया है और एक समय पर खान एवं भूविज्ञान विभाग ने भी खनन गतिविधियों को शहर से बाहर ले जाने की कही थी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा तीन खनन कंपनियों के खनन लाइसेंस की अवधि अगले पांच सं नौ वर्षों तक है, इसलिए अगली लाइसेंस नवीनीकरण के पूर्व हम इन्हें पर्यावरण मंजूरी लेने के लिए कहेंगे। इससे इन कंपनियों को राष्ट्रीय वन्यजीवन बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी।
Published on:
26 Mar 2018 05:19 am
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