
अहिंसा का प्रतिपादन मानवता को बड़ी भेंट: श्रीश्री
बेंगलूरु. आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्धांत को अपनाकर दुनिया से आतंकवाद का खात्मा किया जा सकता है। जैन धर्म ने अहिंसा का प्रतिपादन कर मानवता को बहुत बड़ी भेंट दी है। उन्होंने कहा कि जो अहिंसा के मार्ग का अनुसरण करता है, वही महावीर है।
जैन इटरनेशनल ट्रेड आर्गेनाइजेशन (जीतो) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय जीतो ग्रोथ समिट में शुक्रवार को उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने उद्बोधन में उन्होंने वैश्विक स्तर पर गतिमान जीतो की गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि जीतो ने पूरी दुनिया के युवाओं के लिए आदर्श स्थापित किया है।
जैन समाज का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों को जैन समुदाय से सीखने की जरूरत है। अल्पसंख्यक समुदाय होते हुए कैसे हिम्मत से आगे बढ़ा जाए, देश की प्रगति में योगदान दिया जाए और बिना किसी अपेक्षा के अपने बलबूते विकास को नई गति दी जाए, यह सब जैन समाज से सीखा जा सकता है। जैन धर्म में आत्मविश्वासस और आत्मनिश्चय कूटकूटकर भरा हुआ है। जैन मुनियों और संतों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस समुदाय ने कभी किसी से कुछ मांगा नहीं। आज जब कुछ समुदाय के लोग अपने को हिन्दू धर्म से अलग करने की मांग कर विशेष सुविधा दिए जाने की अपेक्षा कर रहे हैं तब उन्हें जैन धर्म के आत्म विश्वास और आत्म निश्चय की ओर एक बार अवश्य देखना चाहिए। श्रीश्री ने कहा कि कुछ सुविधाओं के लिए अल्पसंख्यक समुदाय बनाने की मांग करना न्यायसंगत नहीं है।
तनावमुक्त जीवन के लिए करें ध्यान
जीतो की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन युवा वर्ग के लिए रोल मॉडल बन गया है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के अधिकांश लोग व्यापार से जुड़े रहने के कारण तनाव में रहते हैं। व्यापार में हैं तो तनाव अवश्यंभावी है। परंतु तनावमुक्त जीवन से ही व्यापार में वृद्धि लाई जा सकती है। तनाव से मुक्ति का एकमात्र साधन है ध्यान करना। उन्होंने कहा कि ध्यान जैन धर्म की आत्मा है, आप सभी को इसका अनुसरण करना चाहिए। जीतो की ओर से स्मृति चिह्न देकर श्रीश्री को सम्मानित किया गया।
Published on:
26 May 2018 05:51 pm
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