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इसलिए चमक उठे तूअर उत्पादक किसानों के चेहरे

अगस्त के दूसरे सप्ताह के दौरान जिले में राहत की बारिश हुई

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इसलिए चमक उठे तूअर उत्पादक किसानों के चेहरे

तूर के लिए निर्धारित लक्ष्य 4.37 लाख हेक्टेयर था लेकिन जिले में 4.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर तूर की बुआई हुई

कलबुर्गी. बारिश का इंतजार कर रहे कलबुर्गी के तूअर किसानों को बड़ी राहत मिली है। अगस्त के दूसरे सप्ताह के दौरान जिले में राहत की बारिश हुई है जिससे मुख्य रूप से तूअर किसानों के चेहरे पर मुस्कान आ गई और उन्हें उम्मीद है अगर अगले कुछ सप्ताह तक इसी प्रकार बारिश हुई तो अच्छी फसल भी होगी।

जिला कृषि कार्यालय के अनुसार जून में जिले में अच्छी बारिश हुई थी जिसके बाद जिले में तूअर, उड़द, मंूग, सोयाबीन और तिल की बड़े पैमाने पर बुआई हुई है। यहां तक कि तूर के लिए निर्धारित लक्ष्य 4.37 लाख हेक्टेयर था लेकिन जिले में 4.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर तूर की बुआई हुई। हालांकि, बाद में जुलाई से लेकर अगस्त के पहले सप्ताह तक जिले में बारिश न के बराबर होने से किसानों की चिंताएं बढ गई। जहां जुलाई महीने में औसत से 54 फीसदी कम बारिश हुई वहीं अगस्त में 10 तारीख तक औसत से 84 प्रतिशत कम बारिश हुई।

ऐसे में अगस्त के दूसरे सप्ताह में अच्छी बारिश होने से तूर किसानों को बड़ी राहत मिली है। वहीं अन्य फसलों को इस बारिश से कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ है। सोयाबीन, तिल, उड़द की फसलें बारिश न होने के बारण लगभग सूख चुकी हैं। वहीं मूंग की फसल भी बुरी तरह प्रभावित है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अन्य फसलों के लिए भले ही मौजूदा बारिश राहत की खबर न लाई हो लेकिन तूर उत्पादक किसानों की उम्मीदें जग गई हैं। जिले में सर्वाधिक मात्रा में तूर की खेती होती है इसलिए बारिश से अधिकांश किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अगले कुछ सप्ताह तक इसी प्रकार बारिश होती रही तभी तूअर किसानों को फायदा होगा अन्यथा यह बारिश नाकाफी है।