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आचार्य से शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय ध्वजारोहण की विनती

आयोजन 28 नवम्बर को

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jain dharm

आचार्य से शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय ध्वजारोहण की विनती

बेंगलूरु. सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम तीर्थ में विराजित आचार्य चन्द्रयश सूरीश्वर से शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय, राजाजीनगर ट्रस्ट की ओर से 25वां ध्वजारोहण महोत्सव के लिए विनती की। ट्रस्ट के अध्यक्ष जयंतीलाल ने बताया कि 24 वर्ष पूर्व शंखेश्वर दादा के जिनालय की प्रतिष्ठा आचार्य स्थूलभद्र सूरीश्वर ने की थी। इस बार रजत जयंती वर्ष 16 नवंबर 2019 को चन्द्रयश सूरीश्वर की निश्रा में मनाया जाएगा। रजत जयंती वर्ष पूर्व 25वां ध्वजारोहण इसी माह 28 नवंबर को होगा। आचार्य से विनती करने वालों में ट्रस्टी मणिभाई, अरविंदभाई, भूपेन्द्रभाई आदि शामिल थे।
मन के शुभाशुभ परिणामों को लेश्या कहते हैं
बेंगलूरु. हनुमंतनगर जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने सोमवार को प्रवचन में उत्तराध्ययन सूत्र की विवेचना करते हुए कहा कि मन के शुभाशुभ परिणामों को लेश्या कहते हैं। छह लेश्याओं में प्रथम तीन कृष्ण, नील, कापोत अप्रशस्त खराब, कर्मों का बंधन करने वाली हैं। अंतिम तीन तेजो, पद्म और शुक्ल लेश्या प्रशस्त धर्म लेश्याएं हैं। इन तीनों में जीप प्राय: सुगति को प्राप्त हेता है। नारकीय जीवों की लेश्या कृष्ण, कापोत और नील होती है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने दो प्रकार के आगार और अणागार धर्म बताए हैं। जो संसार में रहकर गृहस्थ धर्म का पालन करते हैं उनका आगार धर्म कहलाता है। जो संसार व घर-गृहस्थी का त्यागकर जर, जोरु, जमीन को छोड़कर संसार के प्रति आसक्ति, मोह, ममता का त्यागकर निर्लेप भावों को अपनाता है वह अणागार धर्म कहलाता है। संचालन संजय कुमार कचोलिया ने किया।